Bottle gourd

Bottalgaurde

लौकी की खेती भारत के कई देशों में होती है और यह वर्षा ऋतु के दौरों की जाती है, जो जून से अक्टूबर तक चलती है। यह सब्जी सूखी और ठंडी जगहों में अच्छी तरह उग सकती है। लौकी की खेती के लिए निम्न तरह से तैयारी की जाती है:

1. **बीज रोपण**: लौकी के बीज को अप्रैल से जून के बीच में बोया जाता है। इसके लिए खेत को अच्छी तरह से तैयार किया जाता है और फिर बीज बोया जाता है।

2. सिंचाई: लौकी की फसल को प्रथम तीन सप्ताह तक नियमित रूप से सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसके बाद सिंचाई की मात्रा को काम किया जा सकता है।

3. **उर्वरक**: खेत में उर्वरक की आवश्यकता होती है ताकि पौधों को अच्छी तरह से पोषण मिल सके।

4. **कीट-पतंग नियंत्रण**: खेत में कीट-पतंगों से बचने के लिए नियमित रूप से कीट-पतंग नियंत्रण किया जाता है।

5. **काटई**: लौकी की फसल को तैयार होने पर उन्हें काट कर निकल जाता है। ऊपर दी गई प्रकृति के अनुसार, लौकी की खेती की जाती है। यह प्राकृतिक स्थानिक मौसम और भूमि के अनुकूल वातावरण भी बदल सकता है।

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