Thu, Jul 18, 2019

6:23:25 PM

भावान्तर में करोड़ो का फर्जीवाड़ा, फर्जी एंट्री से करोड़ों के भुगतान की तैयारी, जाँच के आदेश

 

मध्य प्रदेश की मंडियों में भावांतर योजना के अंदर किसान व्यापारी एवं मंडी कर्मचारियों की गठजोड़ से सैकड़ों करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के षडयंत्र का मामला प्रकाश में आया है। प्रदेश में फ़्लैट भावान्तर योजना के होनेवाले भुगतानों में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। व्यापारियों और मंडी अफसरों की मिलीभगत से करोड़ों रुपए का फर्जी भुगतान करने की तैयारी थी। इसकी जानकारी के बाद राज्य कृषि विपणन बोर्ड के एमडी फैज अहमद किदवई ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को मंडियों में हुए फर्जीवाड़े की जांच के आदेश दिए हैं। श्री किदवई ने पंजाब केसरी को बताया कि प्रदेश की कई मंडियों में इस तरह के मामले प्रकाश में आए हैं लेकिन भुगतान अभी किसी को नहीं हुआ है भुगतान के पहले हमने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि गेटपास और किसानों की संख्या में अंतर है इसकी पूर्ण जांच कर ही भुगतान की प्रक्रिया को प्रारंभ किया जाए। भावांतर योजना के अंतर्गत खरीफ 2018 के मक्का और सोयाबीन की उपज की खरीदी अक्टूबर से चल रही है जिसके लिए 19 जनवरी 2019 अंतिम तिथि तय है। फर्जीवाड़े की जांच में पता चला है कि कई मंडियों में गेट पास जारी होने और किसानों की संख्या में भारी फर्क है। इसके साथ ही कई मंडियों में बेचे गए सोयाबीन और मक्के की मात्रा में भी भारी अंतर पाया गया है। ऐसे समझें फर्जीवाड़े का गणित मध्य प्रदेश की बेतूल मंडी में गेटपास के अनुसार 20 अक्टूबर से 3 जनवरी के बीच 30714 किसान आए किंतु आवक के अनुसार इन किसानों की संख्या 27593 ही पाई गई। इस तरह 3121 किसानों की संख्या का अंतर रहा। इसी तरह छिंदवाड़ा मंडी में गेटपास के अनुसार 23203 किसान पंजीकृत पाए गए जबकि आवत के अनुसार किसानों की संख्या 33155 रही यानी यहां किसानों की मौजूदगी के बिना ही 9952 किसानों की उपस्थिति बता दी गई। ऐसा ही खेल सोयाबीन और मक्के की मात्रा के मामले में भी किया गया है। जांच में प्रदेश की लगभग 70 से 80 मंडियों में इस तरह के मामले प्रकाश में आए हैं सीहोर जिले की श्यामपुर मंडी, रायसेन जिले की उदयपुरा, रायसेन, सिलवानी, विदिशा जिले की सिरोंज, गुलाबगंज, राजगढ़ जिले की सारंगपुर, बैतूल जिले की मुलताई,भैंसदेही, इंदौर जिले की गौतमपुरा, धार की धामनोद, खरगोन जिले की खरगोन,करही, कसरावद, सेगाव, बड़वानी जिले की अंजड़, बड़वानी,बलवाड़ी, उज्जैन जिले के महिदपुर,तराना, खाचरोद, देवास जिले के खातेगांव,लोहरदा, कन्नौद हाटपिपलिया, बागली में आवक से अधिक अनाज पाया गया जिसका भुगतान अभी शेष है। मंदसौर जिले की शामगढ़, सुवासरा, भानपुरा, नीमच जिले की जावद, रतलाम जिले की सैलाना, आलोट, आगर मालवा की सोयत कला, ग्वालियर की लश्कर, शिवपुरी की बदरवास, सागर जिले की देवरी, रहली, राहतगढ़, बंडा,शाहगढ़ केसली, जैसीनगर, दमोह जिले की हटा, पन्ना जिले के देवेंद्र नगर, टीकमगढ़ के पलेरा, जबलपुर की पाटन, छिंदवाड़ा की पांढुर्णा, सौसर, मंडला की नैनपुर, नरसिंहपुर की करेली, तेंदूखेड़ा, सिवनी की केवलारी, छपारा, लखनादौन, बलारी, सतना जिले की सतना कृषि उपज मंडी में भावांतर योजना में हुई खरीदी में गड़बड़ी सामने आ चुकी है। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ राजेश राजौरा ने कहा कि 29 नवंबर 2018 को खरीफ फसल 2018 के फ्लैट भावांतर भुगतान योजना के सुचारू क्रियान्वयन के पर्यवेक्षण के संबंध में प्रदेश के सभी कलेक्टरों को इस मामले में गड़बड़ी ना हो इसके लिए जांच के आदेश दे दिए गए थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच के बाद जो भी व्यक्ति भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल मध्यप्रदेश में सरकार बदलने के बाद घोटाले के कई मामले प्रकाश में आ रहे हैं भावांतर योजना में यदि सरकार नहीं बदलती तो हो सकता था कि राज्य के खजाने को भ्रष्टाचार के इस मामले का भी बहुत झेलना पड़ता। सूत्रों से पता चला है कि कांग्रेस पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने मुख्य मंत्री कमलनाथ से इस फर्जीवाड़े की शिकायत की थी उसके बाद ही यह मामला प्रकाश में आया है अब देखना यह है कि जिला कलेक्टर भ्रष्टाचार के इस मामले में व्यापारियों एवं मंडी बोर्ड के अधिकारियों की गठजोड़ को कैसे सामने लाते हैं तथा जांच रिपोर्ट क्या कहती है।

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