भोपाल
कोरोना लॉक डाउन के चलते घाटे के कारण सरेण्डर हुई दुकानों के नए सिरे से टेंडर करने के बाद भी सरकार को अपेक्षानुरुप सफलता नहीं मिल रही है। ठेकेदार अपनी शर्तों पर ही काम करने को तैयार है और घाटा उठाने को तैयार नहीं है। इसलिए सरकार को चौथी बार टेंडर करने पड़े है। इस बार आबकारी विभाग ने सत्रह जिलों में छोटे-छोटे कई समूहों में ठेके करने का निर्णय लिया है ताकि दुकानें उठ सके।  भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन सहित आठ जिलों में इस बार 21 समूह बनाए गए है। शेष नौ जिलो में भी छोटे-छोटे समूह बनाए गए है। छोटे समूह बनने पर अब दुकानें अस्सी फीसदी से अधिक राजस्व पर जाने की संभावना है। इन सभी दुकानों के ठेके कल शाम तक फाइनल हो जाएंगे।

घाटे के कारण ठेकेदारों ने छोड़ी थी दुकानें
प्रदेश में इस साल आबकारी विभाग को शराब की दुकानों से 11 हजार 500 करोड़ का राजस्व मिलने की संभावना थी। लेकिन 23 मार्च से कोरोना के चलते लॉकडाउन घोषित होने और शराब दुकानें बंद करने के निर्णय के बाद अप्रैल और मई में भी दुकानें बंद रही। जून के पहले सप्ताह से दुकानें खुली लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण घटी खपत के कारण इससे होने वाली कम आय के चलते ठेकेदार शराब दुकानों का संचालन करने को तैयार नहीं हुए। रिन्यूअल और लाटरी से उठी दुकानें तो चली लेकिन शेष नई दुकानें नहीं खुल पाई। शराब ठेकेदारों ने लाकडाउन अवधि के शुल्क से छूट, खपत के आधार पर नए सिरे से मूल्यांकन की मांग को लेकर हाईकोर्ट में अपील की थी। इसके बाद सरकार ने शपथ पत्र देकर दुकानें चालू रखने वाले ठेकेदारों से प्रस्ताव बुलाए थे। इसमें काफी कम लोग आगे आए। 6 हजार 600 करोड़ की शराब दुकानें ठेकेदारों ने सरेण्डर कर दी।

भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, शहडोल, सिंगरौली, छिंदवाड़ा, बालाघाट में कुल 21 समूहों में ठेके होना है। इसके अलावा अलीराजपुर, अनूपपुर, होशंगाबाद, झाबुआ, मंडला, सिवनी, उमरिया, बैतूल, टीकमगढ़ में भी छोटे समूह बनाकर ठेके बुलाए गए है। तीस जून को ये ई-टेंडर खोले जाएंगे। इसी दिन जिला समिति द्वारा टेंडर फाइनल किए जाएंगे। टेंडर खुलने के बाद एक जुलाई से 31 मार्च की अवधि के लिए शेष अवधि की राशि कम करते हुए शेष राशि का अस्सी फीसदी से अधिक राशि के सभी ठेकों को मंजूर कर लिया जाएगा।