कहा जाता है कि उचित हो द्वार, तो आएंगी खुशियां अपार। प्रवेश द्वार भवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। भवन निर्माण के दौरान प्रवेश द्वार अगर नियमों के अनुसार बनाया जाए तो वह घर के सभी सदस्यों के लिए खुशियों को आमंत्रित करने में सहायक होता है और अगर घर के मुख्य द्वार में दोष पाया जाए तो वह घर में मानसिक, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का कारण भी बन जाता है इसीलिए कहा जाता है कि जिस घर का दरवाजा दोष रहित हो उसी घर में सुख-समृद्धि और रिद्धि-सिद्धि का वास होता है।

इसके अलावा घर में सभी सदस्य सुखी रहते हैं और सभी के बीच तालमेल भी बना रहता है। वास्तु के अनुसार घर में किसी भी समस्या का संबंध प्रवेश द्वार यानि मुख्य द्वार से ही होता है, जिसका असर धीरे-धीरे बाकी चीजों पर नजर आने लगता है।

मुख्य द्वार पर रखें मंगल कलश
कलश का संबंध संपन्नता से होता है। यह शुक्र और चंद्र का प्रतीक है। कलश की स्थापना मुख्य रूप से दो जगहों पर की जा सकती है, मुख्य द्वार पर और पूजा स्थान पर। मुख्य द्वार पर रखने वाले कलश का मुख चौड़ा और खुला होना चाहिए। इसमें पर्याप्त पानी भरकर रखना चाहिए। हो सके तो फूलों की कुछ पंखुडिय़ां इसमें डाल कर रखनी चाहिएं। मुख्य द्वार पर जल से भरा कलश रखने से घर में संपन्नता आती है। किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं करती।

वन्दनवार
किसी भी मंगल कार्य या उत्सव के पूर्व मुख्य द्वार पर वन्दनवार लगाया जाता है। आम के पत्तों का वन्दनवार सबसे अच्छा माना जाता है। इसे मंगलवार को लगाना सर्वोत्तम होता है। इसलिए इसके पत्तों से बना वन्दनवार घर के मुख्य द्वार पर लगाते हैं।

स्वस्तिक
चार भुजाओं से बनी हुई एक विशेष तरह की आकृति है स्वस्तिक। आम तौर पर किसी जगह की ऊर्जा को बढ़ाने-घटाने या संतुलित करने के लिए इसका प्रयोग करते हैं। इसका गलत प्रयोग आपको मुश्किल में डाल सकता है और सही प्रयोग आपको जीवन की तमाम समस्याओं से निकाल सकता है। लाल और नीले रंग का स्वस्तिक विशेष प्रभावशाली माना जाता है। घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर लाल स्वस्तिक लगाने से घर के वास्तु और दिशा दोष दूर होते हैं। मुख्य द्वार के ऊपर बीचों बीच नीला स्वस्तिक लगाने से घर के लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहता है।

गणेश जी का मुख
घर में खुशहाली और शुभता लाने के लिए लोग मुख्य द्वार पर गणेश का चित्र या मूर्ति लगाते हैं परंतु गणेश जी का चित्र बिना नियम और जानकारी के लगाने से मुश्किलें बढ़ जाती हैं। गणेश जी की पीठ की ओर दरिद्रता होती है तथा पेट की ओर संपन्नता। अत: जब भी मुख्य द्वार पर गणेश जी लगाएं, उन्हें अंदर की ओर लगाएं।

आम के पत्ते
आम के पत्तों में सुख को आकर्षित करने की क्षमता होती है। इसके पत्तों की विशेष सुगंध से मन की ङ्क्षचता भी दूर होती है। बाहर की ओर लगाने से घर में धन का अभाव होगा और दरिद्रता बढ़ेगी। अंदर की ओर लगाने से बाधाओं का नाश होगा और हर कार्य में सफलता मिलेगी।

घोड़े की नाल
इसका सीधा संबंध शनि से है। इसका प्रयोग आम तौर से शनि संबंधी घर की समस्याओं में करते हैं। उसी घोड़े की नाल का प्रयोग करना उत्तम होता है, जो घोड़े के पैर में पहले से लगी हो। एकदम नई, बिना इस्तेमाल की हुई नाल, कोई प्रभाव उत्पन्न नहीं करती। शुक्रवार को घोड़े की नाल लाएं, उसे सरसों के तेल में रात भर डुबो दें। शनिवार को नाल निकाल कर घर के मुख्य द्वार पर लगा दें। ऐसा करने से घर के सभी लोगों का शनि ठीक रहेगा, घर का संकट और क्लेश दूर होगा।

इसके अतिरिक्त मुख्यद्वार पर घंटियों की झालर लगाएं, जिसे घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास नहीं होगा। घर में तुलसी का पौधा लगाएं और संध्याकाल में उसके सामने घी का दीपक जलाएं, तो समस्त वास्तुदोषों का नाश होता है। घर के आस-पास उगाई गई हरी दूब का गणेश जी की मूॢत पर चढ़ाने से भी वास्तुदोष समाप्त होता है। सुख-शांति के लिए घर के उत्तरी भाग में धातु से बने कछुए की प्रतिमा रखें, इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह कम होता है। मुख्य द्वार पर क्रिस्टल बॉल लटकाएं और लाल रंग का फीता बांधें।

मुख्यद्वार बनाने से पहले दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गृह का मुख्य द्वार कभी भी दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से घर के सदस्यों को बहुत-सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके स्थान पर घर का प्रवेश द्वार हमेशा उत्तर-पूर्व की ओर या दक्षिण पूर्व की ओर होना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। घर के मुख्य द्वार के सामने कोई पेड़, दीवार या खंभा नहीं होना चाहिए क्योंकि कोई भी छाया घर पर अशुभ प्रभाव डालती है।
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