जबलपुर
जबलपुर गन कैरिज फैक्ट्री में तैयार की गई 155 एमएम 45 कैलिबर धनुष तोप और सारंग गन का शुक्रवार सुबह लॉन्ग प्रूफ रेंज खमारिया में एक साथ परीक्षण किया गया। यह पहला मौका है जब धनुष तोप से जबलपुर में फायरिंग की गई। हालांकि, इससे पहले 21 जनवरी को गन कैरिज फैक्ट्री में ही तैयार की गई सारंग तोप का परीक्षण किया जा चुका था। भारतीय सेना को अब तक 6 धनुष तोप और 8 सारंग गन सौंपी जा चुकी है।

इस अवसर पर दिल्ली से आए डॉयरेक्टर जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस लेफ्टिनेंट जनरल संजय चौहान भी मौजूद रहे। उनकी सामने ही धनुष तोप और सारंग गन का शक्ति परीक्षण किया गया। दोनों ही तोप 37 से 40 किलोमीटर के बीच निशाना साध सकती हैं। इनका निर्माण गन कैरिज फैक्ट्री जबलपुर में ही किया गया है।

पहले पोखरण और बालासोर में होता था परीक्षण
धनुष तोप सेना के बेड़े में शामिल हो चुकी है। इस तोप का राजस्थान के पोखरण और उड़ीसा के बालासोर सहित अन्य स्थानों पर पहले परीक्षण किया गया था। जबलपुर में ही बनी धनुष तोप का उसी शहर में परीक्षण पहली बार हुआ है। धनुष तोप का जबलपुर में ही उत्पादन और परीक्षण होने से अनुमान है कि सालाना 100 करोड़ से अधिक की बचत होगी।

बोफोर्स से भी ज़्यादा ताकतवर है धनुष तोप
धनुष तोप बोफोर्स से भी ज़्यादा ताकतवर है। धनुष तोपों को बोफोर्स का स्वदेशी संस्करण कहा जाता है। गन कैरिज फैक्ट्री को कुल 114 तोपों का ऑर्डर मिला है। धनुष ने सभी परीक्षण पास कर लिए थे। 2011 से शुरू हुआ धुनष का काम 2014 में पूरा हो गया था और लगातार 4 साल से इसका परीक्षण जारी है।

पहली खेप अप्रैल में सेना को सौंपी जा चुकी है
जबलपुर की गन कैरेज फैक्ट्री में तैयार आधुनिक और स्वदेशी तोप धनुष की पहली खेप अप्रैल में सेना को सौंपी जा चुकी है। जबलपुर में हुई फ्लैग ऑफ सेरेमनी में ये तोपें भारत सरकार के रक्षा उत्पादन सचिव- डॉ अजय कुमार की मौजूदगी में सेना को दी गयी थीं।