नई दिल्ली 

पूरे देश में आज महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है. महाशिवरात्रि के दिन लोग व्रत रखते हैं और पूरे विधि विधान से शंकर भगवान की पूजा करते हैं. इस महाशिवरात्रि पर ऐसे विशेष संयोग बन रहे हैं जिससे उन लोगों को खास लाभ मिलने वाला है जो लोग अब तक मनचाहे वर की तलाश में हैं.

महाशिवरात्रि का महत्व

हिंदू पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव पर एक लोटा जल चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. इस दिन व्रत , उपवास , मंत्रजाप तथा रात्रि जागरण का विशेष महत्व है.
 
महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त 

महाशिवरात्रि शाम को 5 बजकर 20 मिनट से शुरु होकर शनिवार 22 फरवरी को शाम 7 बजकर 2 मिनट तक रहेगी. रात्रि की पूजा शाम को 6 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर रात 12 बजकर 52 मिनट तक होगी. शिवरात्रि में जो रात का समय होता है उसमें चार पहर की पूजा होती है.

शिवरात्रि की पूजा विधि

- शिव रात्रि को भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करा कराएं.

- केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं.

- पूरी रात्रि का दीपक जलाएं.


- चंदन का तिलक लगाएं.

- तीन बेलपत्र, भांग धतूर, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं. सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें.

 - पूजा में सभी उपचार चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें.

व्रत खोलने का समय  

चतुर्दशी तिथि भगवान शिव की ही तिथि मानी जाती है. चतुर्दशी तिथि को ही शिवरात्रि होती है. शिवरात्री का व्रत रखने वाले अगले दिन 22 फरवरी को सुबह 6 बजकर 57 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक पारण कर सकते हैं.