दुश्मन, ऐसा नाम जो शायद ही किसी के जीवन में नहीं होगा। कहने का भाव है कि दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई दुश्मन होता है। कुछ लोग अपने इन शत्रुओं का डट कर मुकाबला करतें हैं तो कहीं इनसे डर कर बैठ जाते हैं। जिससे इनके जीवन की गति धीमी पड़ जाती है। कहने का भाव है कि ये अपने जीवन में असफल होने लगते हैं। इसका मतलब यही हुआ कि शत्रु आप को गिराने में सफल हो गए हैं। तो क्या आपको ये मंजूर होगा? कि आपका शत्रु आप से जीत जाए। नहीं न, तो ऐसे में आपको विचार करना होगा कि आख़िर आपको ऐसा क्या करने की ज़रूरत है। अगर आपको समझ न आए तो आपको बता दें अपने दुश्मनों को मात देने के लिए आप ज्योतिष, वास्तु के साथ-साथ धार्मिक शास्त्रों की मदद ले सकते हैं। जी हां, आप सोच रहे होंगे भला इसमें ये शास्त्र हमारी किस प्रकार मदद कर सकते हैं? परंतु ये सच है कि ऐसा कर पाना मुमकिन नहीं।

वो इसलिए क्योंकि इनमें कुछ ऐसे उपाय आदि वर्णित हैं, जिन्हें अगर आप अपनाते हैं तो आपको कुछ करना भी नहीं पड़ेगा, आपके दुश्मन खुद ही आपका पीछा छोड़ देंगे। आइए जानते हैं ऐसे खास व चमत्कारी उपाय, जिन्हें करने से आपके जीवन में सुख-शांति के साथ-साथ खुशियां का आगमन हो सकता है।

प्रातः शिव मंदिर में जाकर रोज़ाना घी का दीपक जलाएं तथा “ॐ नमो भगवते रुद्राय” मंत्र का यथा शक्ति जप करें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो भी जातक इस उपाय को लगातार 21 दिनों तक करता है। इससे आपके विरोधी हमेशा-हमेशा के लिए शांत हो जाएंगे।

मध्य रात्रि में हनुमान जी की उपासना करें और हनुमान जी के सामने शुद्ध सरसों के तेल का दीपक जलाएं और लाल फूल अर्पित करें। वास्तु की दृष्टि से उपाय करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा आप बजरंग बाण का पाठ भी कर सकते हैं।

अपने शत्रुओं को परास्त करने के लिए घर में भगवान नृसिंह के चित्र की स्थापना करें और हर दिन गोधूलि वेला में भगवान नृसिंह को लाल फूल अर्पित करते हुए उनकी पूजा करें। इसके बाद “ॐ नृ नृसिंहाय शत्रु भुज बल विदीर्णाय स्वाहा” मंत्र का यथाशक्ति जप करें और विरोधियों के शांत होने की प्रार्थना करें।

घर में चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर देवी बगलामुखी के चित्र या प्रतिमा की स्थापना करें और अखंड दीपक जलाएं। इसके बाद पीले पुष्प और पीला नैवेद्य अर्पित करें तथा देवी बगलामुखी से पहले भैरव, मृत्युंजय की उपासना करें। इसके बाद “ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय, जिह्ववां कीलय, बुद्धि विनाशय, ह्रीं ऊँ स्वाहा” मंत्र का जप करें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस मंत्र का कम से कम 36 हज़ार या एक लाख बार जप किया जाता है। संभव हो तो इसके बाद दशांश हवन भी करें।