भोले की नगरी काशी में महाशिवरात्रि और रंगभरी एकादशी का पर्व तो हर साल मनाया जाएगा, लेकिन इस मौके पर सदियों से चली आ रही खास परंपराएं अबकी अंतिम बार निभाई जाएगी। इसके बाद भोलेनाथ के तिलक से लेकर महाशिवरात्रि के दिन विवाह और फिर रंगभरी एकादशी के दिन निकलने वाली बाबा की गौना बारात इतिहास में दर्ज हो जाएगी।

निभाई जाती है गौना बारात की रस्म
काशी विश्वनाथ मंदिर से गंगा तट तक करीब 50 हजार वर्ग मीटर एरिया में बनने वाले विश्वनाथ धाम (कॉरिडोर) के दायरे में मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी का वह आवास भी आया है जहां तीन शताब्दी से बाबा के विवाह व गौना बारात की रस्म निभाई जाती रही है। इस पौराणिक भवन की मान्यता माता गौरा के भवन के रूप में है।

अंतिम बार निकलेगी गौना बारात
मंदिर प्रशासन ने इस भवन को खरीद लिया है और खाली करने के लिए रंगभरी एकादशी तक मोहलत दी है। ऐसे में वसंत पंचमी पर वासंती उल्लास के बीच गौरा भवन में काशीपुराधिपति का तिलक उत्सव, महाशिवरात्रि पर बाबा की बारात और होली के पर्व से पहले रंगभरी एकादशी के दिन दूल्हे के रूप में सजे बाबा की गौना बारात अंतिम बार निकलेगी।

होली खेलते हैं बाबा विश्वनाथ
मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ स्वयं भक्तों के साथ जमकर होली खेलते हैं। इसी के साथ रक्षाबंधन पर झूला, अन्नकूट भोग आदि परंपराएं भी किताबों में ही पढ़ने को मिलेगी।

PM मोदी को भेजा जाएगा निमंत्रण
महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि काशीपुराधिपति श्रीकाशी विश्वनाथ के विवाहोत्सव के निमित्त परंपरा के तहत होने वाले सभी अनुष्ठान व रस्मों को हर बार से ज्यादा भव्यता प्रदान की जाएगी। इसमें आने के लिए बनारस के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत तमाम विशिष्टजनों को आमंत्रण भेजा जाएगा।

प्रतिमा के लिए स्थान मांगा
महाशिवरात्रि पर बाबा की पंचवदन प्रतिमा के और गौना उत्सव में शिव परिवार के रजत पालकी पर दर्शन होते हैं। पंचवदन प्रतिमा के निवास के लिए महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने विश्वनाथ धाम में ही स्थान मांगा है। मंदिर प्रशासन इसके लिए सहमत हो गया है, लेकिन अभी सहमति पत्र मिलना बाकी है। महंत का कहना है कि मैं कॉरिडोर के दायरे से भले ही बाहर चला जाऊं पर बाबा इससे कैसे बाहर ले जा सकता हूं। इसलिए मंदिर प्रशासन से जगह मांगी है।