नई दिल्ली 
एक सैनिक अपनी जिंदगी में किस तरह की कुर्बानियां देता है वह आप इस बात से समझ सकते हैं कि एक जवान अपनी ही शादी के दिन घर नहीं पहुंच सका। देश की रक्षा में जुटा जवान हिमाचल के मंडी का रहने वाला है और भारी बर्फबारी की वजह से कश्मीर से निकल नहीं सका। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी इस खबर को ट्वीट करते हुए सेना ने कहा है कि एक सैनिक के लिए देश हमेशा सबसे पहले है और जिंदगी उसके लिए इंतजार कर लेगी। मंडी का रहने वाले सैनिक सुनील की गुरुवार को शादी थी। दो हफ्तों से हो रही बर्फबारी की वजह से वह घाटी में ही फंसा रहा। जवान की शादी की रस्में बुधवार को शुरू हुईं और गुरुवार को बारात लड़भडोल के एक गांव के लिए खैर ग्राम से निकलने वाली थी। दोनों परिवारों ने अपने घरों को भव्य रूप से सजवाया था। सभी रिश्तेदार पहुंच गए थे। सभी लोग दूल्हे सुनील का इंतजार कर रहे थे। उसकी छुट्टियां 1 जनवरी से शुरू होनी थी और वह कुछ दिनों पहले ही बांदीपोरा स्थित ट्रांजिट कैंप पर पहुंच गया था। भारतीय सेना के चिनार कॉर्प्स ने रविवार को ट्वीट करके कहा, 'जिंदगी इंतजार करेगी यह वादा है। भारतीय सेना का एक जवान कश्मीर घाटी में भारी बर्फबारी की वजह से अपनी शादी में नहीं पहुंच सका। चिंता मत करिए जिंदगी इंतजार करेगी। देश हमेशा सबसे पहले है। दुलहन के परिवार वाले नई तारीख के लिए राजी हैं। एक सैनिक की जिंदगी का बस एक और दिन।' 


रास्ते थे बंद, फ्लाइट उड़ नहीं सकी 
खराब मौसम की वजह से सभी रास्ते बंद हो गए थे, जिसके चलते सुनील बांदीपोरा में ही फंस गया। दुलहन और उसके परिवार को जब पता चला कि सुनील अबतक घर ही नहीं पहुंचा तो सभी निराश हो गए। सुनील ने श्रीनगर से उन सभी लोगों से फोन पर बात की और उन्हें बताया कि खराब मौसम की वजह से फ्लाइट टेकऑफ नहीं कर सकती है। 

'देश की सेवा में जुटे सुनील पर गर्व है' 
दुलहन के चाचा संजय कुमार कहते हैं कि शादी की सभी तैयारियां दोनों परिवारों ने की थी। उन्होंने कहा, 'हमारे सभी रिश्तेदार भी पहुंच गए थे। सभी सुनील का इंतजार कर रहे थे, सबको उसकी फिक्र थी। वह सीमा पर देश की सेवा में जुटा है, इस बात की वजह से हम उस पर गर्व करते हैं। अब तो एकमात्र विकल्प यही है कि शादी की तारीख को बढ़ा दिया जाए।' 

बर्फबारी में बढ़ जाती है सेना की जिम्मेदारी 
कश्मीर में तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी और चुनौती सर्दियों में काफी बढ़ जाती है। भारी बर्फबारी के बावजूद सैनिक सीमा पर चौकन्ने रहते हैं। इसके साथ ही आम नागरिकों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। दिसंबर-जनवरी में भारी बर्फबारी की वजह से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त होता है।