नई दिल्ली 
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA)और एनआरसी को लेकर सभी विपक्षी दल मुद्दे की जरूरत को समझें और एक साथ एक मंच पर आएं। उन्होंने कोलकाता में कहा कि- 1 अप्रैल, 2020 से शुरू होने वाले राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) अभ्यास में यदि कोई सहयोग नहीं करता तो नरेंद्र मोदी सरकार लाखों लोगों को दंडित करने जैसी मूर्खता नहीं करेगी।

बता दें कि सीएए और एनआरसी को लेकर देशभर में पहले ही बवाल मचा हुआ है। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल मूल के 20 लोगों की ओर से संशोधित नागरिकता कानून-2019 (सीएए) की संवैधानिकता और गृह मंत्रालय की ओर से इसे लागू करने के लिए जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार (17 जनवरी) को केंद्र से जवाब तलब किया।
 
कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA)और एनआरसी को लेकर सभी विपक्षी दल मुद्दे की जरूरत को समझें और एक साथ एक मंच पर आएं। शीर्ष अदालत ने पिछले साल 18 दिसंबर को सीएए की संवैधानिकता की समीक्षा करने का फैसला किया था जबकि इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। संशोधित कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक आए हिंदू, सिख, पारसी, बौद्ध, जैन और ईसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है।

नई याचिका में गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना को चुनौती देते हुए कहा गया है, ''सीएए की धाराएं 2,3,5,6 संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद-19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन करती हैं।" याचिका में आरोप लगाया है कि सीएए और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का उल्लेख नागरिकता कानून 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय परिचय पत्र का वितरण)-2003 की धारा का संबंध है। हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी,जैन और ईसाई समुदाय के लोगों को धार्मिक उत्पीड़न की कल्पना के आधार पर नागरिकता मिल रही है।