नई दिल्ली

सरकार ने गुरुवार को एडजेस्टेड ग्रास रेवेन्यू (एजीआर) के आधार पर टेलिकॉम कंपनियां भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को सांविधिक भुगतान या जुर्माना या किसी तरह की छूट देने से इनकार कर दिया. इसकी जानकारी राज्यसभा में केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक सवाल के लिखित उत्तर में दिया, जिसमें पूछा गया था कि क्या इस तरह का कोई प्रस्ताव है?

मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका
दरअसल टेलिकॉम कंपनियों ने एजीआर बकाए पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं दायर की हैं, जिसमें जुर्माना और ब्याज शुल्क के माफी की मांग की गई है. वोडाफोन आइडिया को एजीआर बकाए के तौर पर 54,000 करोड़ रुपये, जबकि भारतीय एयरटेल को 43,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है.

सरकार का राहत देने से इनकार
कुल मिलाकर दूरसंचार कंपनियों को सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपये का एजीआर बकाए का भुगतान करना है. और सरकार इसपर किसी तरह की राहत देने के मूड में नहीं है. लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) की गणना एजीआर के आधार पर की जाती है. वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल जुर्माना और ब्याज को लेकर निराश है, जिस लेकर उनके अस्तित्व पर सवालिया निशान लग रहे हैं.

इसी एजीआर के लिए प्रोविजन बनाने के कारण जुलाई-सितंबर तिमाही में वोडाफोन आइडिया और एयरटेल को जबरदस्त घाटा हुआ था. साथ ही टेलीकॉम कंपनियों के हाल ही में अपने मोबाइल चार्जेस बढ़ाने के पीछे भी एजीआर चुकाने के पैसे का दबाव ही है.

बता दें कि उन नॉन-टेलीकॉम कंपनियों को भी एजीआर का बकाया चुकाना होगा, जिनका टेलीकॉम कारोबार बेहद छोटा है, मगर उनके पास लाइसेंस है. इनमें गेल, रेलटेल, दिल्ली मेट्रो और पावर ग्रिड जैसी सरकारी कंपनियां भी शामिल हैं.