नई दिल्ली
लगातार पांच बार रीपो रेट घटाने के बाद इस बार रिजर्व बैंक (RBI) ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन इससे निराश होने की जरूरत नहीं है। रिजर्व बैंक ने बेशक रेट नहीं घटाए हैं, लेकिन लोन पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं यानी लोन सस्ते हो सकते हैं। RBI चाहता है कि बैंक पॉलिसी रेट में इस साल अब तक हुई कटौती का फायदा मकान और गाड़ी की खरीदारी या कारोबार के लिए लोन लेने वाले नए कस्टमर्स को जल्दी दें।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैंकों से साफ-साफ कहा कि अब तक हुए रेट कट का फायदा ग्राहकों को पूरी तरह से पहुंचाया नहीं गया है। मतलब साफ है कि बैंक पहले अब तक हुए रेट कट का लाभ ग्राहकों को दें। दास ने यह भी कहा कि दरों में आगे कटौती होने की संभावना बनी हुई है।


इसका मतलब रेट कट का दौर थमा नहीं है, बल्कि रिजर्व बैंक ने छोटा-सा ब्रेक लिया है। वह चाहता है कि बैंक रीपो रेट में अब तक हुई कटौती के हिसाब से लोन सस्ता करें। वैसे RBI को घटते ग्रोथ रेट की चिंता भी है, लेकिन उसकी नजर आने वाले बजट और महंगाई दरों में बढ़ोतरी पर भी है। दरअसल इस बार RBI ने रीपो और अन्य रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। रीपो रेट को 5.15 पर्सेंट और रिवर्स रीपो रेट को 4.90 पर्सेंट पर बरकरार रखा है।

क्या हैं कारण
RBI के रेट कट नहीं करने के दो अहम कारण हैं। पहला, RBI ने अब तक रीपो रेट में जितनी कटौती की, उनका पूरा लाभ बैंकों ने ग्राहकों को नहीं दिया। दूसरा, बढ़ती खुदरा महंगाई। मॉनिटरी पॉलिसी की समीक्षा के बाद शक्तिकांत दास ने साफतौर पर कहा कि RBI अब तक रीपो रेट में 135 बेसिस पॉइंट की कटौती कर चुका है, जबकि इसके मुकाबले बैंकों ने नए लोन पर ब्याज दरों में सिर्फ 0.44 पर्सेंट ही कटौती की है। इसका मतलब है कि रीपो रेट जितना कम हुआ, लोन उतने सस्ते नहीं हुए। यानी RBI पहले के रेट का सही तरीके से ट्रांसमिशन चाहता है। इसके अलावा, प्याज और सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते खुदरा महंगाई दर 4.6 पर्सेंट पर पहुंच गई है।

लोन सस्ते होंगे?
SBI के फॉर्मर CMD पी चौधरी का कहना है कि RBI बार-बार कह चुका है कि उसने अब तक जितना रेट कट किया है, उस हिसाब से बैंकों ने ग्राहकों को फायदा नहीं पहुंचाया। यही कारण है कि इस बार RBI ने थोड़ा रुकने का फैसला किया है ताकि बैंकों को यह संदेश जाए कि अब तक जो रेट कट हुआ, उसका सही तरीके से ट्रांसमिशन करो। थर्मेक्स लिमिटेड के MD एमएस उन्नीकृष्णन का कहना है कि RBI का रुख स्पष्ट है कि दरों में और कटौती की जा सकती है, लेकिन ये कटौती का सही समय नहीं है, क्योंकि RBI ने अभी तक जो कटौती की है उसका अभी तक पूरा ट्रांसमिशन नहीं हुआ है। जब तक उसका अधिकतम ट्रांसमिशन नहीं होगा और कटौती का कोई फायदा नहीं होगा। अब आरबीआई का पूरा जोर इस पर रहेगा कि बैंक अब तक हुए रीपो रेट कट का लाभ ग्राहकों को पहुंचाने के बारे में सोचें।

ग्रोथ का अनुमान घटाया
RBI ने वित्त वर्ष 2019-20 में GDP ग्रोथ का अनुमान 6.1 पर्सेंट से घटाकर 5 पर्सेंट कर दिया है। इससे पहले अक्टूबर में RBI ने चालू वित्त वर्ष में GDP ग्रोथ 6.1 पर्सेंट रहने का अनुमान जताया था। इसके आलावा, रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी छमाही के लिए खुदरा महंगाई 4.7-5.1 पर्सेंट रहने का अनुमान रखा है।

बजट पर नजर
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास के मुताबिक, इकनॉमिक ऐक्टिविटी कमजोर हुई है। आउटपुट भी कमजोर बना हुआ है। सरकार और RBI ने ग्रोथ बढ़ाने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। अगले साल के बजट में बेहतर ढंग से पता चलेगा कि इकॉनमी में तेजी के लिए सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उनका क्या फायदा हुआ है। RBI की अगली मॉनिटरी पॉलिसी की मीटिंग 4 से 6 फरवरी को होगी।