इंदौर
लोकसभा की पूर्व स्पीकर और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुमित्रा महाजन ने कहा है कि वह महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने के लिए पर खुद से कुछ ना कहकर कांग्रेसी नेताओं का सहारा लेती थीं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में बीजेपी के शासनकाल में वह महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुद से कुछ नहीं कह सकती थीं क्योंकि उनकी ही पार्टी की सरकार थी।

मध्य प्रदेश के इंदौर से आठ बार की सांसद रहीं सुमित्रा महाजन ने कहा, 'राज्य में जब शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार थी, तब महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर मैं चुप रहती थी क्योंकि यह मेरी ही पार्टी की सरकार थी। मुझे लगता था कि इंदौर की जनता के भले के लिए कुछ मुद्दों को उठाना चाहिए तो मैं कांग्रेस के नेताओं का सहारा लेती थी।'

'ताई' उपनाम से मशहूर लोकसभा की पूर्व स्पीकर महाजन ने कहा, 'इंदौर से जुड़ी समस्याओं और मुद्दों के लिए मैं कांग्रेसी नेताओं जीतू पटवारी और तुलसी सिलावट से विनम्रता से निवेदन करती थी। इसके साथ ही मैं उन्हें इस बात के लिए भी आश्वस्त करती थी कि शिवराज सिंह चौहान संबंधित मुद्दे को देखेंगे।'

सुमित्रा इंदौर में सोमवार को राज्यपाल लालजी टंडन की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा, 'मैंने जो भी किया वह इंदौर के विकास को ध्यान में रखते हुए किया। जब हमारा अजेंडा इंदौर का विकास करना हो तो फिर पार्टी पॉलिटिक्स को दिमाग में नहीं रखते हैं।'

बता दें कि शिवराज सिंह चौहान ने 2005 से 2018 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर कुर्सी संभाली। पिछले साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के हाथों मिली हार के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। वहीं लगातार आठ बार इंदौर लोकसभा सीट से सांसद रहीं सुमित्रा महाजन ने इस साल हुए आम चुनाव में चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया, जिसके बाद शंकर लालवानी यहां से लड़े और सांसद बने।