लंदन
ब्रिटेन के मशहूर लंदन ब्रिज के निकट शुक्रवार को हुई चाकूबाजी में शामिल संदिग्ध उस्मान खान का रिश्ता पाकिस्तान से जुड़ गया है। वह 10 साल पहले अपने तीन जिहादी साथियों के साथ पाकिस्तान गया भी था। उसकी योजना पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में एक टेररिस्ट ट्रेनिंग कैंप स्थापित करने की थी। ब्रिटिश कोर्ट ने उस्मान को 2012 में भी आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तत होने का दोषी पाया था। ब्रिटेन के मशहूर लंदन ब्रिज के निकट शुक्रवार को हुई चाकूबाजी की घटना में दो लोग मारे गए थे। वहीं स्कॉटलैंड यार्ड ने फर्जी विस्फोटक जैकेट पहने एक पुरुष संदिग्ध को घटनास्थल पर मार गिराने की पुष्टि की थी।लंदन ब्रिज उन इलाकों में से एक है जहां जून 2017 में आईएसआईएस के आतंकी हमले में 11 लोगों की जान गई थी।


उस्मान आतंकवादी संगठन अल-कायदा की विचारधारा से प्रभावित था। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन के मुताबिक, उस्मान खान को साल 2010 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर हमले की साजिश रचने का दोषी पाया गया था और फरवरी 2012 में वुलविच क्राउन कोर्ट ने उसे आठ साल की जेल की सजा सुनाई थी। उस्मान स्टोक-ऑन-ट्रेंट, कार्डिफ और लंदन के 9 कट्टरपंथी समूह का एक सदस्य था। उस्मान ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में अपनी पुश्तैनी जमीन पर 'आतंकवादियों के लिए ट्रेनिंग कैंप' स्थापित करने की योजना बनाई थी। 2010 में वह कट्टरपंथी समूह के सभी 9 सदस्यों में सबसे कम उम्र (19 वर्ष) का था।


सजा देने वाले जज ने दी थी गंभीर चेतावनी
तब वुलविच क्राउन कोर्ट के जस्टिस विल्की ने उस्मान के लिए सजा तय करते वक्त कहा था कि वह और उसके दो और साथी ग्रुप के बाकी छह सदस्यों के मुकाबले बहुत ज्यादा कट्टर हैं और तीनों के अंदर जिहाद का भूत सवार है। जज ने उस्मान खान को तब तक जेल से रिहा नहीं करने का फैसला दिया था जब तक कि यह महसूस न किया जाए कि वह अब किसी के लिए खतरा नहीं है। हालांकि, बाद में उसकी रिहाई की यह शर्त वापस ले ली गई और उसे दिसंबर 2018 में रिहा कर दिया गया था।

पीओके में टेरर कैंप बनाने की थी योजना
जस्टिस विल्की ने कहा था कि उस्मान अपने दो साथियों नजम हुसैन और मोहम्मद शाहजहां के साथ फंड जुटाकर आतंकवादी प्रशिक्षण कैंप स्थापित करने की योजना बना रहे थे। योजना के मुताबिक, उस्मान और हुसैन को पाकिस्तान में आतंकियों को ट्रेनिंग देने के लिए 2011 जनवरी में ब्रिटेन से निकलना था। वहीं, आतंकवाद पर नजर रखने वाले एक स्वतंत्र विशेषज्ञ ने जुलाई 2013 की एक रिपोर्ट में लिखा था कि उस्मान स्टोक के उन तीन जिहादियों में एक है जिन्होंने पाकिस्तान के केंद्रशासित प्रदेश फाटा जाकर फंड जुटाने, पीओके में टेररिस्ट ट्रेनिंग कैंप बनाकर वहां ट्रेनिंग में हिस्सा लेने की योजना बनाई थी। उनके पास से अंग्रेजी भाषा में अल-कायदा की पत्रिका इंस्पायर मिली थी। इस आतंकी समूह ने डाकखानों में लेटर बॉम्ब रखने पर भी विचार किया था।

2010 में रची थी इतनी बड़ी साजिश
वुलविच कोर्ट में सुनवाई के वक्त बताया गया था कि इन्होंने लंदन स्टॉक एक्सचेंज और स्टोक के पबों के शौचालयों में पाइप बम लगाने की भी प्लानिंग की थी। इन आतंकियों के पास से अपने संभावित शिकारों की हस्तलिखित सूची भी मिली थी जिसमें लंदन के तत्कालीन मेयर बॉरिस जॉन्सन, सेंट पॉल कैथेडरल के डीन, लंदन स्थिति दो अमेरिकी दूतावासों और स्टॉक एक्सचेंज का जिक्र था।

नौ जिहादियों के गैंग में थे दो बांग्लादेशी
जस्टिस विल्की ने कहा था कि नौ आतंकवादियों का यह गैंग आतंकवादी गतिविधियों को सलीके से अंजाम देने के लिए लंबी अवधि की योजना बना रखी थी जिसे सफलता मिली होती तो ब्रिटेन में भी हाहाकार मच सकता था। उन्होंने अपने नोट में कहा, 'इस गैंग ने पाकिस्तान से प्रशिक्षित और अनुभवी आतंकवादी बनकर ब्रिटेन को आतंकवादी हमलों से दहला देने का सपना देखा था।' इस आतंकी समूह के सात सदस्य ब्रिटिश नागरिक थे जबकि दो बांग्लादेशी थे।