नई दिल्ली 
महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर गुरुवार को कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के नेताओं के बीच में एक बैठक चल रही है। इस बैठक में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इस बैठक में तीनों पार्टियों के नेता मौजूद हैं। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने बुधवार को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के अंतर्गत मुद्दों पर चर्चा के लिए एक कमेटी गठित की थी। 

इधर शिवसेना ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की ''पटकथा पहले ही लिख दी गयी थी और उन्होंने राज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अब पार्टियों को सरकार बनाने के लिए छह महीने का समय दे दिया है। पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राष्ट्रपति शासन लगाए जाने पर मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं क्योंकि सत्ता अब भी परोक्ष रूप से भाजपा के हाथ में ही है।
 
शिवसेना को सरकार बनाने का दावा जताने के लिए महज 24 घंटे का वक्त दिए जाने तथा अतिरिक्त समय दिए जाने से इनकार करने पर राज्यपाल की आलोचना करते हुए शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना में संपादकीय में कहा, ''ऐसा लग रहा है कि कोई अदृश्य शक्ति इस खेल को नियंत्रित कर रही है और उसके अनुसार फैसले लिए गए।''

मंगलवार को लागू हुआ राष्ट्रपति शासन
हाराष्ट्र में राजनीतिक गतिरोध के बीच मंगलवार शाम को राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने केन्द्र को भेजी गयी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मौजूदा हालात में राज्य में स्थिर सरकार के गठन के उनके तमाम प्रयासों के बावजूद यह असंभव प्रतीत हो रहा है। शिवसेना ने आरोप लगाया कि जब वह सरकार गठन के लिए दावा जताने के वास्ते और समय मांगने राज भवन गयी तो प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।