रांची

महाराष्ट्र के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को झारखंड में झटका लगा है. झारखंड में 19 सालों तक भाजपा के साथ चली ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) से गठबंधन टूट गया है. अब बीजेपी झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव में अकेले उतरेगी.

53 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी बीजेपी बाकी 27 सीटों पर भी अपना उम्मीदवार उतारेगी. वहीं एक निर्दलीय उम्मीदवार का पार्टी समर्थन करेगी. बता दें कि बीजेपी और आजसू के बीच सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पा रही थी, जिसके बाद पार्टी ने गुरुवार को फैसला लिया कि झारखंड में अकेले चुनावी मैदान में उतरेंगे.

भाजपा ने राज्य की कुल 81 विधानसभा सीटों में से 53 प्रत्याशियों की सूची जारी कर चुकी है, जबकि आजसू ने भी 12 प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है.

आजसू से अलग होने वाली भारतीय जनता पार्टी झारखंड में अकेले नजर आ रही है. यही कारण है कि इस चुनाव में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पूरी तरह बिखरा नजर आ रहा है. बिहार में भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रहा जनता दल (युनाइटेड) जहां अकेले चुनावी मैदान में उतर गया है, वहीं राजग की घटक लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) भी सीट बंटवारे से नाराज होकर 50 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है.

जद (यू) ने चुनाव की घोषणा से पहले ही झारखंड में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी. जद (यू) के वरिष्ठ नेता प्रवीण सिंह कहते हैं कि जद (यू) यहां मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरी है. उनका कहना है कि जद (यू) झारखंड बनने के बाद भी कई सीटों पर विजयी हो चुकी है.

केंद्र सरकार में भाजपा की भागीदार बनी लोजपा ने झारखंड में 50 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का फैसला लिया है. झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव के लिए 30 नवंबर से 20 दिसंबर तक पांच चरणों में मतदान होना है. नतीजे 23 दिसंबर को आएंगे.

साल 2014 के विधानसभा चुनाव में 37 सीटें पाने वाली भाजपा ने बाद में झारखंड विकास मोर्चा (झामुमो) से अलग होकर विलय करने वाले 6 विधायकों के सहारे पहली बार बहुमत की सरकार बनाई थी. वर्ष 2000 में गठित हुए इस राज्य में रघुवर 10 पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले मुख्यमंत्री हैं.