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Friday, November 16th, 2018

दुर्घटना में लड़कियां बचीं बाल बाल, ट्रेफिक व्यवस्था पर उठे सवाल !

 

 

हरदा

गुरुवार शाम को हुए सड़क हादसे ने शहर की यातायात व्यवस्था पर फिर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। हालांकि नाबालिग लड़कियां कुचलने से बाल बाल बचीं हैं। लेकिन इस हादसे ने भविष्य की यातायात व्यवस्था को चेताया है। 

 

देखना यह है कि सेंस और लाइसेंस के अभाव वाले नाबालिगों को वाहन सौपते पालक आखिर कब जागेंगे व निर्धारित गति से तेज चलते वाहनों को रोकने के लिए जिम्मेदार आखिर आखिरकार कब सुध लेंगे और मैदानी मोर्चा संभालेंगे ?

 

ये है घटनाक्रम -

इंदौर से हरदा आ रही यादव बस की चपेट में दो लड़कियां आते आते बचीं। हालांकि जिस गाड़ी पर दोनों लड़कियां सवार थीं वो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है।  साईं मंदिर के पास सुदामा नगर कॉलोनी की सड़क जो खण्डवा बायपास से इंदौर रोड पर मिलती है। स्कूटी से साईं मंदिर की ओर से हरदा शहर आने के दौरान स्कूटी सवार दो नाबालिग लड़कियां  सुदामा नगर की ओर मुड़ीं। इस दौरान पीछे से आ रही यादव एयर कंडीशन बस की चपेट में आ गईं। स्कूटी तो बस के अगले पहियों में घुसी, टक्कर से लडकियां उछलकर दूर गिरीं। राहगीरों की मदद से दोनों घायलों को हॉस्पिटल पहुंचाया। बताया जा रहा है गंभीर घायल एक लड़की को इंदौर रेफर किया , वहीं दूसरी का इलाज जारी है। 

 

क्या कहा परिजन ने -

एक लड़की के चाचा सुनील लेखवानी ने दूरभाष पर बताया कि ये लड़कियां जिनकी उम्र करीब 14 वर्ष है। कोचिंग पढ़ने गयी थीं। इस दौरान ये हादसा हुआ। इनकी भतीजी को एक निजी चिकित्सक ने दो माह का  बेडरेस्ट बताया है। रीढ़ में माइनर फ़्रैक्चर है।  लेखवानी ने कहा कि एक अन्य लड़की को सिर हाथ पैर में चोट होने पर इंदौर रेफर किया है। लेखवानी के अनुसार ये बच्ची डरी सहमी है। कुछ पूछने पर रो देती है। अभी कुछ बात न हो पाई है। 

 

दुर्घटना के पीछे छिपे तथ्य -

हरदा शहर सीमा में चौपहिया वाहन बस, कार , डंपर अन्य वाहन बेख़ौफ़ अंधाधुंध दौड़ते हैं। इनकी गति पर नियंत्रण होना जरूरी है। 

 

शहर में नाबालिग बच्चों के वाहन चलाने पर कोई लगाम नहीं है। दिन भर कोचिंग जाने वाले स्कूली बच्चों का जमावड़ा सड़को पर रहता है। नाबालिग बच्चे छोटे बड़े वाहनों को फर्राटे से चलाकर स्कूल/कोचिंग जाते हैं।  पालकों की देखरेख के अभाव में ये बच्चे वाहन सुविधा मिलते ही समय से पहले घर से निकल कर साईं मंदिर के आसपास बनी कॉलोनियों में एकांत में मंडराते हैं। इनके पालकों पर कार्रवाई का अभाव भी बढ़ रही दुर्घटनाओं का एक कारण है। 

 

मुख्य मार्ग पर  बीच सड़क में मवेशियों का कब्जा होना। इनसे बचते बचाते वाहन चलाना भी जोखिम भरा है। 

 

प्रति गुरुवार साईं मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ होने से मुख्य मार्ग पर यातायात बढ़ जाता है। स्टॉपर और जवान तैनाती का अभाव खतरों/हादसों को निमंत्रण देता है।

Source : Agency

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