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Tuesday, August 14th, 2018

मुंबई: ट्रैफिक पुलिस ने वसूला 119 करोड़ रुपये जुर्माना, 10 गुना ज्यादा चालान काटा

मुंबई 
मुंबई में तेज रफ्तार गाड़ी चलाने पर ट्रैफिक पुलिस ने इस साल पिछले साल से 10 गुना ज्यादा चालान काटा है। इसके पीछे श्रेय जाता है ई-चालान सिस्टम को जिसकी मदद से अब नियमों का उल्लंघन करने वाले बचकर भाग नहीं पा रहे हैं। यही नहीं 2016 से अब तक ट्रैफिक पुलिस 119 करोड़ जुर्माना भी वसूल चुकी है। हालांकि यह बात दूसरी है कि जुर्माने वसूलने की दर में गिरावट आई है क्योंकि ज्यादातर आर्थिक दंड अभी तक भरा ही नहीं गया है।  

ट्रैफिक पुलिस ने अक्टूबर 2016 से इस साल जून तक मुंबईकरों से ट्रैफिक नियम उल्लंघन के मामले में 119 करोड़ वसूले किए हैं। यह तथ्य हमारे सहयोगी अखबार मुंबई मिरर को आरटीआई निवेदन के जरिए मिला है। इसमें बताया गया है कि अक्टूबर 2016 में जब से ई-चालान की प्रक्रिया की शुरुआत हुई है, ट्रैफिक मैनेजर अब तक 53 लाख ई टिकट जारी कर चुके हैं जिससे लगभग 172. 44 करोड़ जुर्माने की राशि तय होती है। इसमें अभी 53.8 करोड़ का जुर्माना नियम तोड़ने वालों से वसूला जाना बाकी है। 

यह डेटा पुलिस ने उपलब्ध कराया है जिससे यह भी पता चलता है कि ई-चालान जारी करने की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इनमें कई कारण हैं जैसे- तेज गति में गाड़ी चलाना, सफेद लाइन से आगे गाड़ी रोकने, नो-पार्किंग जोन में गाड़ी खड़ा करना, नो-एंट्री लेन में गाड़ी चलाना, सिग्नल फांदना और ट्रैफिक फ्लो में बाधा पहुंचाना। 


तेज स्पीड में गाड़ी चलाने पर ई-टिकट जारी करने की संख्या में 10 गुना बढ़ोतरी हुई। 2017 में 42 हजार मामलों की तुलना मे इस साल 5.7 लाख ऐसे मामलों में टिकट जारी किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुंबई में अलग-अलग 40 स्पीड कैमरों के लगने से स्पीडिंग टिकट के नंबरों की संख्या भी अधिक है। 

जॉइंट पुलिस कमिश्नर (ट्रैफिक) अमितेश कुमार ने बताया, 'हमने हर महत्वपूर्ण जगह पर कैमरे लगवाए हैं जिनके जरिए हम कानून तोड़ने वाले के प्रति अधिक सख्त हो गए हैं। हम मोटरचालकों से निवेदन करते हैं कि गाड़ी को तय स्पीड पर ही चलाएं।' 

वहीं बकाया जुर्माने पर उन्होंने कहा, 'जैसा कि हम मोटरवाहन चालकों को नियम तोड़ने पर सड़क पर नहीं रोक रहे या उन्हें ऑन स्पॉट जुर्माना भरने के लिए दबाव बना रहे हैं इसलिए फाइन कलेक्शन में हम थोड़ा पिछड़ गए। साथ ही फाइन भी कभी-कभी देर से तय हो पाते हैं। लेकिन सब कुछ डिजिटली रिकॉर्ड है तो किसी भी आरोपी को कभी भी अपना बकाया भरना पड़ सकता है। 

Source : Agency

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