ग्वालियर
पिछले तीन दशक की चंबल की राजनीति में एक दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी माने जाने वाले कांग्रेस के दो नेता आपस में गले मिलने जा रहे हैं। खबर है कि दशहरे के दो दिन बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया भिंड में प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री डॉ. गोविंद सिंह के घर रात्रि भोजन करेंगे। चंबल में कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेता उनके साथ होंगे। इसे मध्यप्रदेश में कांग्रेस की राजनीति के लिए शुभ लक्षण भी माना जा रहा है। अभी कुछ माह पहले ही सिंधिया ने मीडिया से पूछा था कि डॉ. गोविंद सिंह कौन हैं, मैं उन्हें नहीं जानता?

प्रदेश में कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ विधायक डॉ. गोविंद सिंह भिंड की लहार विधानसभा से लगातार सात चुनाव जीत चुके हैं। इन सभी चुनावों में सिंधिया खेमा उनका खुलकर विरोध करता रहा है। मूलत: समाजवादी परिवेश से 1993 में जनता दल से कांग्रेस में आए डॉ. गोविंद सिंह को कांग्रेस में दिग्विजय सिंह का समर्थक माना जाता है। ग्वालियर चंबल की राजनीति में सिंधिया और सिंह दो अलग-अलग ध्रुव रहे हैं। पिछले दिनों डॉ. गोविंद सिंह ने दिल्ली में सिंधिया के घर पहुंचकर उनसे सौजन्य मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद ही इन दोनों नेताओं के संबंधों पर जमीं बर्फ पिघलने लगी थी। प्रदेश में कमलनाथ सरकार बनने के बाद सबसे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डॉ. गोविंद सिंह को फोन कर न केवल बधाई दी थी, बल्कि यह भी कहा था कि वे चाहते हैं कि पार्टी के सबसे वरिष्ठ विधायक होने के नाते उन्हें मंत्रिमंडल में सम्मानजनक पद मिले।

10 अक्टूबर को सिंधिया ने पूरा दिन भिंड में रहने का कार्यक्रम बनाया है। इस दौरान वे कांग्रेस के जिला कार्यालय में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। इसके बाद सिंधिया जिलाध्यक्ष रमेश दुबे और पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह के घर चाय पीने जाएंगे। पास के एक गांव में भी सिंधिया के जाने का कार्यक्रम है। शाम 6.30 बजे सिंधिया वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ डॉ. गोविंद सिंह के भिंड जिला मुख्यालय स्थित निवास पर पहुंचकर उनके साथ भोजन करेंगे।

बताया जाता है कि झाबुआ उप चुनाव के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनना लगभग तय हो गया है। सिंधिया को उनके सलाहकारों ने सलाह दी है कि वे पार्टी में मतभेदों को दूर करने का प्रयास करें। इसी सलाह के तहत शुरुआत डॉ. गोविंद सिंह के घर से हो रही है, लेकिन उम्मीद है कि सिंधिया प्रदेश के अन्य ऐसे कांग्रेस नेताओं से मेलमिलाप बढ़ाएंगे जिन्हें कांग्रेस में उनका विरोधी माना जाता है।