पटना
बिहार की राजधानी पटना (Patna) के गांधी मैदान (Gandhi Maidan) में मंगलवार को आयोजित रावण दहन समारोह में बीजेपी (BJP) का कोई भी बड़ा नेता शामिल नहीं हुआ. इस समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar), कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा (Madan Mohan Jha) और बिहार विधानसभा के स्पीकर विजय कुमार चौधरी (Vijay Kumar Chaudhary) शामिल हुए. मंच पर उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी (Sushil Modi), सांसद रामकृपाल यादव (Ram Kripal Yadav), सांसद और केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) सहित बीजेपी के चारों विधायकों की कुर्सियां भी लगाई गई थी लेकिन वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. जबकि आमंत्रण पत्र में इन तमाम नेताओं का नाम भी छपा था.

पटना में हुए जल जमाव ने बीजेपी और जेडीयू में दूरियां बढ़ानी शुरू कर दी है. पटना जल जमाव के बहाने बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने सीधे-सीधे नीतीश कुमार पर निशाना साधा था. जिसके जवाब में जेडीयू ने भी पलटवार किया था. मामला लगातार गर्माता जा रहा था. इसी बीच रावण दहन के दौरान पटना के गांधी मैदान में बीजेपी और जेडीयू के बीच तब और दूरी देखने को मिली जब रावण वध के दौरान मंच पर बीजेपी के कोई भी नेता मौजूद नहीं थे.

इस मामले पर कार्यक्रम के आयोजक कमल नोपानी से पूछा गया तो उन्होंने इशारों में बताया कि पता नहीं बीजेपी के नेता क्यूं नहीं आए, जबकि तमाम नेताओं ने आने की हामी भरी थी. वहीं सबसे ज्यादा हैरानी सुशील मोदी के नहीं आने पर हुई, क्योंकि जब भी नीतीश कुमार पर हमला होता है तो सुशील मोदी खुलकर नीतीश कुमार के साथ खड़े होते दिखे हैं. लेकिन इस बार सुशील मोदी भी नदारद दिखे.

जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने सवाल पूछ डाला कि बीजेपी नेता जनता को जवाब दे कि वे क्यों नहीं आए? मंच पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा जरूर नजर आए जिन्हें नीतीश कुमार ने अपने बगल में उस कुर्सी पर बिठाया जिस पर सुशील मोदी का नाम सटा हुआ था. मदन मोहन झा ने इस सवाल पर चुटीले अंदाज में कहा कि मुझे आमंत्रण मिला और मैं आया. जो नहीं आए ये सवाल तो उनसे पूछना चाहिए. वहीं, रवि शंकर प्रसाद ने साफ़ कर दिया कि पटना वासियों के दुःख के घड़ी में वह उनके साथ हैं. इस वजह से वो दुर्गा पूजा भी नहीं मना रहे हैं.

बहरहाल, पटना साहिब और पाटलिपुत्र के साथ साथ चारों विधान सभा पर बीजेपी का कब्जा है और यही वजह है कि बीजेपी नेताओं ने रावण वध कार्यक्रम में शामिल नहीं होकर अपने वोटरों को ये मैसेज दिया है कि वो उनके दुःख के सहभागी हैं. लेकिन मंच से नदारद होने की खबर आने वाले समय में बीजेपी और जेडीयू के संबंध को खराब कर सकती है.