ग्वालियर
गीता का ज्ञान भारतीय संस्कृति की वो धरोहर है जिसे आज विश्व भी अपनाता है । योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के मुख से युद्ध भूमि में निकले उदगार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने महाभारतकाल में थे। तभी तो ADGP स्तर के एक अधिकारी ने इस ज्ञान को बंदियों तक बांटकर उनके जीवन में उजाला करने का संकल्प लिया है है। ADGP राजा बाबू सिंह ने आज दशहरे के मौके पर सेन्ट्रल जेल में 700 गीता वितरित की।

25 साल की पुलिस की  नौकरी में खतरनाक अपराधियों से लेकर खूंखार डकैतों तक से दो दो हाथ करने वाले ग्वालियर रेंज के आईजी (ADGP) राजाबाबू सिंह को कुछ वर्ष  पहले श्रीकृष्ण की नगरी वृन्दावन में गीता का ज्ञान प्राप्त हुआ। उनके जीवन पर इसका इतना सकारात्मक प्रभाव पड़ा कि उन्होंने अब दुसरे के जीवन में उजाला करने का मन बना लिया है। इसीलिए 2 अक्टूबर गांधी जयंती ऐ उन्हिने गीता वितरित करने का अभियान शुरू कर दिया है। वे कहते हैं कि गीता पढने से खासकर युवाओं को जहाँ आत्मिक शांति मिलेगी वहीँ उन्हें उनके मन में उठ रहे हर सवाल का जवाब भी मिलेगा।

दशहरे के अवसर ग्वालियर सेन्ट्रल जेल का नजारा बदला बदला सा था। माहौल में एक आध्यात्मिकता की महक महसूस हो रही थी । अवसर था कर्म को प्रधान बताने वाली योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकली गीता के ज्ञान के वितरण का । ग्वालियर आईजी राजाबाबू सिंह आज अपने गीता वितरण अभियान के तहत ग्वालियर सेन्ट्रल जेल पहुंचे  । यहां उन्होंने जेल में बंद 700 बंदियों को श्रीमद् भगवद गीता बांटकर अपराध से दूर रहने का संकल्प दिलाया है। राजाबाबू सिंह का कहना है कि दशहरा बुराई को खत्म करने का त्यौहार है  इसलिए उन्होंने बंदियों को गीता बांटी है जिससे उनके अंदर के रावण का अंत हो सके। राजाबाबू सिंह ने कैदियों को समाज की मुख्यधारा के साथ जोड़ने की मुहिम शुरू की है। जिसके लिए उन्होंने दशहरे का दिन चुना और गीता के ज्ञान से जेल में बंद बन्दियों का हृदय परिवर्तन करने में लगे है । उधर गीता प्राप्त करने वाले जेल में सजा काट रहे बंदियों का भी मानना है कि गीता उनके जीवन में जरूर बदलाव लाएगी और उन्हें उनके अन्दर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करने में सफलता मिलेगी  जिससे उन्हें अपराधिक प्रवृत्ति को त्यागने की ऊर्जा मिलेगी और  वो एक बार फिर से समाज की मुख्यधारा के साथ जुड़ जा जाएंगे । गीता मिलने के बाद जेल। प्रबंधन ने तय किया है कि अब प्रतिदिन ग्वालियर की सेंट्रल जेल में 2 घंटे श्रीमद भगवद गीता का ज्ञान बंदियों को दिया जाएगा और गीता के 18 महत्वपूर्ण श्लोकों को बंदियों को सुनाया जाएगा जिससे उनका हृदय परिवर्तन हो और अपराध की दुनिया से वो खुद को हमेशा के लिए अलग कर लें।