जबलपुर
मध्‍य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) द्वारा महापौर का अप्रत्यक्ष चुनाव कराने वाला बिल राज्यपाल लालजी टंडन (Governor Lalji Tandon) ने फिलहाल रोक दिया है, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए हैं. राज्यपाल के पास दो अध्यादेश पहुंचे थे जिनमें से एक को मंजूरी दे दी गई, लेकिन महापौर के चुनाव संबंधित बिल को राज्यपाल लालजी टंडन ने रोक दिया. बिल रोके जाने के बाद राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा (Rajya Sabha MP Vivek Tankha) ने राज्यपाल के नाम एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने राज्यपाल को कैबिनेट की अनुशंसा में कार्य करने वाला बताते हुए विपक्ष की बात सुनकर बिल न रोकने की अपील की थी.

इस ट्वीट पर स्पष्टीकरण देते हुए तन्खा ने कहा कि उन्होंने न्यूज पेपर में छपी खबर को पढ़ने के बाद यह ट्वीट किया है. राज्यपाल की दो मुख्य भूमिकाएं होती हैं. पहली भूमिका कैबिनेट के मार्गदर्शक की होती है, जिसमें उनके पास जाने वाले सभी विधेयक और प्रस्ताव पर वे सहमति जताते हैं और उसमें आवश्यकता के अनुसार संशोधन करते हैं. यदि राज्यपाल को इस बिल में कोई संदेह है तो वे सरकार से बात करें और फिर उस पर सहमति दें, लेकिन विपक्ष की बात सुनकर बिल रोक देना, यह गलत परंपरा शुरू हो जाएगी. तन्खा के इस ट्वीट के बाद एक बार फिर राजनीति गर्माने के आसार बन गए हैं.