इस्लामाबाद

भारत में सीमा पार घुसपैठ के आरोपों को नकारने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अब खुद ही इसे अप्रत्यक्ष तौर पर स्वीकार किया है। इमरान खान ने पीओके के लोगों को ट्वीट कर संबोधित करते हुए लिखा है, 'आजाद जम्मू-कश्मीर में कश्मीरियों के गुस्से को मैं समझता हूं। उन्हें सीमा पार के अपने साथियों की चिंता है, लेकिन किसी भी व्यक्ति का मानवीय सहायता के लिए एलओसी पार करना भारत के नैरेटिव को मदबूत करेगा।'

अपने ट्वीट में इमरान खान ने भले ही मानवीय सहायता के प्रॉपेगैंडे की बात कही है। लेकिन इतिहास इस बात की तस्दीक करता है कि सीमा पार से मानवीय सहायता नहीं बल्कि आतंकवादी घुसपैठ करते रहे हैं। साफ है कि इमरान ने माना है कि पाकिस्तान और पीओके से भारत में घुसपैठ होती रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि बचाने के लिए फिलहाल वह सतर्क हैं।
 इमरान ने एक और ट्वीट में लिखा कि यदि आप सीमा पार करते हैं तो इससे भारत के पाकिस्तानी 'इस्लामिक टेररिज्म' के अजेंडे को मजबूती मिलेगी। उनकी इस टिप्पणी से साफ है कि दुनिया भर में पाकिस्तानी पैठ के तथ्य को स्वीकार किए जाने से वह चिंतित हैं और अब छवि बचाने की कोशिश में जुटे हैं। बता दें कि बीते 5 अगस्त को भारत ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया था, जिस पर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम देशों के समक्ष मानवाधिकार का मुद्दा उठाया था।

हालांकि उसका यह प्रॉपेगैंडा फेल हो गया और फ्रांस, सऊदी अरब, रूस समेत तमाम देशों ने इसे भारत का आंतरिक मसला बताया था। यही नहीं अमेरिका समेत कई देशों ने पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद पर लगाम कसने की हिदायत भी दी।

अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित हाउडी मोदी इवेंट में भी पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस्लामिक आतंकवाद पर खुलकर हमला बोला था। इसके बाद 27 सितंबर को पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी पाकिस्तान का नाम लिए बिना आतंकवाद से निपटने के लिए वैश्विक एकता की बात कही थी।