इस्लामाबाद

पहले से ही बेहद ताकतवर पाकिस्तानी सेना आर्थिक खस्ताहाली में फंसे देश को चलाने में और बड़ी भूमिका निभाने जा रही है। सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने डूबती इकॉनमी को रफ्तार देने के उपायों को लेकर पाकिस्तान के बड़े कारोबारियों से मुलाकात की। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की वित्तीय राजधानी कराची और रावलपिंडी स्थित सैन्य दफ्तरों में बड़े कारोबारियों के साथ तीन हाई सिक्यॉरिटी बैठकें हो चुकी हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये बैठकें आपसी संपर्कों के जरिए मुमकिन हुईं, जिनमें बाजवा ने इकॉनमी पर मंडरा रहे संकट से निपटने को लेकर चर्चा की। नाम न जाहिर करने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया, 'इस पर चर्चा की गई कि निवेश बढ़ाने के लिए कौन से कदम उठाए जा सकते हैं।' कुछ बैठकें ऐसी थीं जिनमें तुरंत फैसले लेकर सरकार के टॉप अफसरों को निर्देश जारी किए गए। इन बैठकों से वाकिफ लोगों ने बताया कि जनरल बाजवा बिजनस कम्युनिटी में भरोसा लौटाने को लेकर काफी चिंतित हैं। हालांकि सेना के प्रवक्ता ने इन बैठकों के बारे में कुछ बताने से इनकार कर दिया।

पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली का असर वहां की मिलिट्री पर साफ-साफ दिखाई दे रहा है। पिछले एक दशक में ऐसा पहली बार हुआ है जब (2020 का) रक्षा बजट फ्रीज कर दिया गया है। ऐसा तब है जब पाकिस्तानी सैनिक अफगानिस्तान के आतंकियों और भारत के हालात के कारण हाई अलर्ट पर हैं।

पाकिस्तान में कई बिजनस लीडर और आर्थिक विश्लेषक देश को लेकर जनरलों की भूमिका का स्वागत कर रहे हैं। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के पास सेना के मुकाबले काफी कम अनुभव है और सेना देश में सबसे ज्यादा सम्मानि भी है। वहीं कई लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि पाकिस्तान के लोकतंत्र के लिहाज से सेना के लगातार बढ़ते रोल का क्या मायने होगा और उन नागरिक संस्थानों का क्या भविष्य क्या होगा जिन्हें अपनी जडें जमाने का कभी मौका नहीं दिया गया।

सिटीग्रुप इंक के पूर्व बैंकर यूसुफ नजर ने कहा, 'अर्थव्यवस्था के प्रबंधन में सेना का बढ़ता रोल पाकिस्तान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर धक्के की तरह है।' यूसुफ पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था पर एक किताब भी लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसके दूरगामी असर होंगे। वहीं, पाक वित्त मंत्रालय में प्रवक्ता ओमर हामिद ने कहा कि हम आर्मी की ओर से इकॉनमी को लेकर कोई प्रक्रियात्मक हस्तक्षेप नहीं देख रहे हैं। सेना अपना काम कर रही है और हम अपना।

इकॉनमी की ग्रोथ का अनुमान 2.4% का है, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है। राजकोषीय घाटा बढ़ने के कारण पाकिस्तान ने मई 2019 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 6 अरब डॉलर का कर्ज लिया था, ताकि इकॉनमी में स्थिरता लाई जा सके। इस वर्ष जून में खत्म हुए वित्त वर्ष में पाकिस्तान का बजट घाटा बढ़कर जीडीपी का 8.9% पर पहुंच गया था। रेकॉर्ड आयातों के चलते दो साल पहले विदेशी मुद्रा भंडार खस्ताहाल हो गया था। गौरतलब है कि पाकिस्तानी वित्त वर्ष जुलाई से जून का होता है।