भोपाल
महात्मा गांधी की डेढ़ सौ वी जयंती पर राज्य सरकार गांधीजी को याद करने के उन तेरह स्थानों पर गांधी पर संगोष्ठी कराएगी जहां गांधीजी आए थे। इन स्थानों पर गांधीजी पर केन्द्रित चित्र प्रदर्शनी भी लगाएगी।

जनसंपर्क विभाग ने इसके लिए प्रदेश के तेरह स्थान चिन्हित किए है। राष्टपिता महात्मा गांधी भारत में आजादी की अलख जगाने के लिए देशभ्रमण के दौरान मध्यप्रदेश  आए थे। उनकी पहली यात्रा 1918 में इंदौर में हुई थी। यहां 28 से 31 मार्च तक वे रुके  थे। इस दौरान होलकर विश्राम गृह में वे रुके, एडवर्ड हाल में एक प्रदर्शनी का उद्घाटन उन्होंने किया। नेहरु पार्क में उन्होंने भारतीय हिंदी सम्मेलन के आठवे अधिवेशन का शुभारंभ किया और दत्त मंदिर के मैदान में सार्वजनिक सभा को संबोधित किया।

6 जनवरी 1921 को वे छिंदवाड़ा में चिटनवीसगंज के मैदान में उन्होंने सार्वज्निक सभा और महिला सभा को संबोधित किया।  सिवनी में जनसमूह को संबोधित किया  खंडवा में घंटाघर में उनका 1921 में भाषण हुआ था। 1929 में वे भोपाल नबाव हमीदुल्ला खां के आमंत्रण पर आए और राहत मंजिल में रहे। बेनजीर मैदान में उन्होंने सार्वजनिक सभा को संबोधित किया। मारवाड़ी रोड पर खादी भंडार का निरीक्षण किया। रेलवे स्टेशन पर भी उन्होंने भाषण दिया।

 इसके बाद 1933 में बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, बैतूल, सागर, दमोह, कटनी, जबलपुर, मंडला, हरदा और खंडवा वे गए। 29 अप्रैल 1935 को वे इंदौर के डायमंड क्लब में रुके, टाउन हाल में सम्मेलन हुआ और सेठ हुकुमचंद के निवास पर भी वे गए। वे महू भी गए। जबलपुर के भेड़ाघाट में वर्ष 1941 में और 1942 में मदनमहल स्टेशन पर उतरे तथा द्वारिका प्रसाद मिश्र के घर गए। इनमें से तेरह स्थानों पर 2 अक्टूबर को संगोष्ठी और गांधीजी के चित्रों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी।