पटना 
लोकसभा की एक और विधानसभा की पांच सीटों पर होने वाले उप चुनाव में महागठबंधन के नये समीकरण की असली परीक्षा होगी। पिछले चुनाव में विधानसभा की सभी पांच सीटों पर महागठबंधन का ही कब्जा था। लेकिन बाद में जदयू के महागठबंधन छोड़ने के साथ पांच में चार विधायक एनडीए का हिस्सा हो गये। एक मात्र सीट किशनंगज पर कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी जो अब भी महागठबंधन के साथ है। 

पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का स्वरूप अलग था। उस समय राजद, जदयू और कांग्रेस साथ थी। इस समीकरण ने उन सभी पांच विधानसभा सीटों पर कब्जा जमा लिया था जिसपर अभी चुनाव होना है। लेकिन वर्तमान में महागठबंधन से जदयू अलग हो गया है। जीतन राम मांझी की पार्टी हम और उपेन्द्र कुशवाहा की रालोसपा महागठबंधन के साथ हो गई है। पिछले चुनाव में रालोसपा एनडीए के साथ थी। 

राज्य की राजनीति में बना यह नया समीकरण लोकसभा चुनाव में सफल नहीं हो सका। लेकिन तब माना गया कि वह चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ा गया था। लिहाजा उप चुनाव में 21 अक्टूबर को होने वाली वोटिंग को ही अगले विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। इन चुनाव में महागठबंधन के लिए अपनी सभी उन सीटों को बचाने की कड़ी चुनौती होगी जिनपर पिछले समीकरण के साथ जीत हासिल की गई थी। 

महागठबंधन में फंस सकता है सीटों का पेच 
महागठबंधन के घटक दलों में सीटों को लेकर सामूहिक रूप से अभी बात नहीं हो पाई। तेजस्वी यादव रविवार को झारखंड गये हैं। दो दिन में लौटने के बाद सीटों को लेकर घटक दलों से बात हो सकती है। लेकिन वर्तमान में घटक दलों से उठ रहे स्वर से लग रहा है कि पेच फंसेगा। कम से कम नाथनगर और सिमरी बख्तियरपुर दो सीट पर तीनों दलों की दावेदारी से पेच सुलझाना आसान नहीं होगा। दरौंदा और बेलहर पर राजद की दावेदरी में कोई बाधा नहीं है। वहीं, लोकसभा की समस्तीपुर सीट का तो महागठबंधन में कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय है। उस सीट से पिछले चुनाव में भी कांग्रेस ने ही उम्मीदवार दिया था। 

इसी के साथ किशनगंज विधानसभा सीट पर कांग्रेस की दावेदारी मजबूत है। राजद इन दो सीटों को छोड़ विधान सभी की शेष बची सभी चार सीटों पर अपना उम्मीदवार देना चाहता है। लेकिन कांग्रेस भी सिर्फ किशनगंज सीट लेकर संतोष करने के पक्ष में नहीं है। उसने नाथनगर या सिमरी बख्तियारपुर में से किसी एक सीट पर दावा ठोकने का मन बना लिया है। हम ने भी नाथनगर और किशनगंज सीट पर दावा ठोकने का फैसला किया है। रालोसपा अभी शांत है। लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार वह भी सिमरी बख्तियारपुर सीट पर दावा ठोक सकती है। ऐसे में चुनाव मैदान में उतरने के पहले महागठबंधन के घटक दलों को आपस में ही जूझना होगा।