भोपाल
कमलनाथ सरकार (kamalnath government) नर्मदा (narmada scam)और धर्म के नाम पर हुए घोटालों की जांच कराएगी. सीएम कमलनाथ ने शिवराज सरकार (shivraj government)का नाम लिए बिना भोपाल में हुए संत समागम में इसका एलान किया. उन्होंने संतों की मांग पर कहा कि सरकार उन्हें जम़ीन के पट्टे देने पर विचार करेगी.

भोपाल के मिंटो हॉल में संत सम्मेलन हुआ. सरकार के निर्देश पर इसके कर्ताधर्ता कम्प्यूटर बाबा थे. दावा किया गया कि इसमें प्रदेश भर के करीब 1000 संत शामिल हुए. सम्मेलन में सीएम कमलनाथ, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी मौजूद थे.

सीएम कमलनाथ ने संत समागम में मंच से एलान किया कि मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी और धर्म के नाम पर हुए घोटालो की जांच की जाएगी. उनका इशारा शिवराज सरकार के दौरान हुए नर्मदा में अवैध खनन और नर्मदा परिक्रमा के दौरान एक साथ 1 करोड़ पौधे रौंपने की ओर था.

साधु संतों की मांग पर सीएम कमलनाथ ने कहा सरकार जब उद्योगपतियों को ज़मीन दे सकती है तो साधु संतों को ज़मीन देने में क्या दिक्कत है. उन्होंने कहा साधु-संतों को ज़मीन का पट्टा देने से परहेज नहीं है.

चुनाव प्रचार में साधु संतों का ठेका लेने का दावा करने वालों के पेट में आज दर्द हो रहा होगा. छिंदवाड़ा में हनुमान मंदिर बनाने पर भी विरोधियों के पेट में दर्द हुआ था. हमारे मंदिर में जाने और साधु-संतों से मेल मुलाकात करने पर भी विरोधियों को तक़लीफ होती है.

सीएम कमलनाथ ने कहा कांग्रेस सरकार ने 9 महीने में नीति और नीयत का परिचय दिया है. हम प्रचार प्रसार में विश्वास नहीं करते. सरकार जनता की सेवा के लिए कर्तव्य निभा रही है. उन्होंने कहा भारत की पहचान आध्यात्मिक शक्ति से है.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने संतों से कहा देश की नई पीढ़ी को आध्यात्म का संदेश दें. नयी पीढ़ी को आध्यात्मिक संस्कृति से जोड़े रखने की जरूरत है. कमलनाथ ने कहा 35 साल पहले लोकसभा में आध्यात्म मंत्रालय बनाने की ज़रूरत बतायी थी. प्रदेश में खोला गया अध्यात्म विभाग उसी भावना का परिणाम है.

सीएम कमलनाथ ने कहा साधु संतों के आशीर्वाद से उनका 250 ग्राम खून बढ़ गया है. संतों को अब सरकार के सामने कोई मांग नहीं रखना पड़ेगी. सरकार उनके हित में फैसले करेगी.