रियाद

सऊदी अरब में अरामको के तेल संयंत्रों पर ड्रोन हमले के बाद पूरी दुनिया में तेल की कीमतों पर असर पड़ा है साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है। कुछ दिन पहले ही फ्रांस ने जी-7 समिट के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने की कोशिश की थी लेकिन यह संभव नहीं हो पाया था। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने भी कहा है कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार सऊदी के चिर-प्रतिद्वंद्वी ईरान से आए थे। उन्होंने कहा कि अब इस बात की जांच की जा रही है कि 'उन्हें कहां से दागा गया।' इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है जिसका असर भारत पर भी पड़ेगा और तेल की कीमतों में 5 से 6 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।

 सऊदी अरब के अरामको तेल संयंत्रों पर हमले की जिम्मेदारी यमन के हुती विद्रोहियों ने ली है जो ईरान समर्थित हैं। इन हमलों में सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के अब्कैक स्थित सबसे बड़े तेल शोधन संयंत्र और खुरैस स्थित तेल क्षेत्र को निशाना बनाया गया था। हुती विद्रोहियों ने और हमले करने की धमकी भी दी है।
 
ट्रंप ने कहा, जवाब देने को हैं तैयार
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को इन हमलों ने हवा दे दी है। डॉनल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि सऊदी अरब में तेल संयंत्रों पर हुए हमले पर प्रतिक्रिया देने के लिए अमेरिका तैयार है। यह पहला मौका है जब राष्ट्रपति ने एक संभावित अमेरिकी सैन्य प्रतिक्रिया का संकेत दिया है। ट्रम्प ने ट्वीट किया, ‘सऊदी अरब मे तेल संयंत्र पर हमला हुआ। हमारे पास यह मानने का वाजिब कारण है कि हम अपराधी को जानते हैं। यदि इसकी पुष्टि हो जाती है तो हम तैयार हैं लेकिन हम इसके बारे में सऊदी अरब से जानना चाहते हैं कि इस हमले का क्या कारण है।’ माइक पोंपियो ने भी कहा था कि कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है कि यह हमला यमन ने किया है। उन्होंने भी ईरान को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
 
फिर हमले की धमकी
इराक के प्रधानमंत्री ने शनिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियों को फोन करके कहा कि उनका देश इसमें शामिल नहीं था। इस बीच, हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर और हमले करने की धमकी दी। गौरतलब है कि इराक में ईरान समर्थित कई मिलिशिया मौजूद हैं। वहीं, बगदाद ने हाल के समय में सऊदी अरब के साथ अपने संबंधों को दुरुस्त करने के लिए कदम उठाए हैं। सऊदी अमेरिका का एक अहम सहयोगी देश है।

5 से 6 रुपये बढ़ सकती है तेल की कीमत
सऊदी के प्लांट्स पर हमले के बाद जानकारों का मानना है कि अगले 15 दिनों में भारत में भी इसका असर देखने को मिलेगा और पेट्रोल-डीजल की कीमतें 5 से 6 रुपये बढ़ सकती हैं। । कोटक की हालिया एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में उछाल आने के कारण भारत की तेल विपणन कंपनियां अगामी पखवाड़े में डीजल और गैसोलीन के दाम में पांच रुपये से छह रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर सकती हैं। सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हमले के बाद सोमवार को तेल का दाम तकरीबन 20 फीसदी की वृद्धि के साथ 71 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया।