हरदा
प्रदेश के हरदा जिले (Harda District) में रिकॉर्ड तोड़ बारिश से खेतों में पानी भरने से खड़ी फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच चुकी है. जिले में अतिवृष्टि से लगभग बर्बाद हो रही फसलों के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट (Economic Crisis) खड़ा हो गया है. फसलों में नुकसान के बाद किसान अब सर्वे की बात कर रहे हैं. जबकि बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन (Soybean) की फसल को हुआ है.

लगातार खेतों में पानी भरा होने से पौधे में लगी सोयाबीन की फली गलकर काली पड़ रही है, तो यही हाल खेतों में लगी उड़द और मक्का फसल का हो रहा है. संकट की इस घड़ी में किसान प्रदेश सरकार से मदद की गुहार लगा रहा है. किसानों का कहना है कि सर्वे कर नुकसान की फसल बीमा राशि और मुआवजा दिया जाए.

हरदा जिले में अभी तक 1644 मिमी बारिश हो चुकी है जो औसत वर्षा से 383 मिमी ज्यादा है. जिले में 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर के रकबे में सोयाबीन फसल की बुआई की गयी थी. किसानों के लिए पीला सोना कही जाने वाली सोयाबीन फसल पर बारिश ने संकट खड़ा कर दिया है. लगातार हो रही बारिश से खेतों में पानी भरा रहने से सोयाबीन की फसल गलन का शिकार हो रही है. खेतों में पानी भरा रहने से सोयाबीन की पौधे जमीन से पोषक तत्व नहीं ले पा रहे है, जिससे सोयाबीन का पौधा पूरा गलने लग गया है. जिले में जारी बारिश से खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल में लगी फलिया टूटकर गिर रही हैं और उसमें अंकुरण हो रहा है. जिले में 1 लाख 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कुल 87 करोड़ का बीज किसानों ने खरीद कर लगाया है, जिसमें प्रति हेक्टेयर लगभग 10 हजार रुपये के कीटनाशकों का छिड़काव किया गया. इसकी लागत 1 अरब 50 करोड़ रुपये के करीब है. किसानो का कहना है की जल्द ही बारिश नहीं थमी तो जिले में सेकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान होगा जिसका आकलन करना मुश्किल होगा.

जिले में कुल 16 हजार हेक्टेयर में मक्का की बुआई की गयी थी. बारिश के कारण मक्का की फसल पूरी फसल खेतों में गलकर पिली पड़ गयी है. जिले में किसानों ने करीब 4 करोड़ 80 लाख रुपये का हाई ब्रीड मक्का का बीज खरीद कर लगाया था, जिसमें लगभग 16 करोड़ रुपये की कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया गया था. ग्राम आलनपुर के किसान सेवाराम ने कहा कि उन्होंने 15 एकड़ में मक्का लगायी थी, लेकिन अतिवृष्टि से फसल पूरी बर्बाद हो गयी है.

हरदा जिले में खरीफ फसलों में उड़द की बुआई भी बड़े रकबे में की गयी थी. जिले में लगभग 10 हजार हेक्टेयर में उड़द फसल किसानों ने बोई थी. सरकारी मूल्य (8050 रुपये) के अनुसार 1 करोड़ 61 लाख रुपये का उड़द का बीज खरीद कर किसानों ने बोया था, जिस पर 15 करोड़ की कीटनाशक दवाओं का खर्च किसानों ने किया था. ग्राम आलनपुर के रहने वाले उन्नतशील किसान महेश अडिंग ने न्यूज़ 18 से हुई चर्चा में कहा कि उन्होंने 25 एकड़ में उड़द फसल लगायी थी. बारिश से फसल बर्बाद हो गयी है. उत्पादन न के बराबर होने से उन्हें 10 से 12 लाख रुपये का का नुकसान हुआ है.

जिले में कृषि विभाग के अधिकारी भी इस बात को मान रहे हैं कि जिले में अतिवृष्टि से फैसलें प्रभावित हो रही हैं. कृषि विभाग के सहायक संचालक डीएस वर्मा ने कहा कि जिले में विभाग की टीम खेतों का निरीक्षण कर रही है. किसानों को खेतों से पानी निकासी के लिए सुझाव भी दिए जा रहे है. अधिक बारिश के कारण खेतों में बड़ी मात्रा में पानी भरा है, जिसकी वजह से सोयाबीन में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया नहीं हो रही है और फसल प्रभावित हो रही है. फिलहाल कितना नुकसान हुआ है इसका आकलन अभी मुश्किल है. धूप निकलने के बाद वास्तविक क्षति का पता लगेगा.