भोपाल
मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) की कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) अब साधु-संतों के मार्गदर्शन पर काम करेगी. इसको लेकर 17 सितंबर को भोपाल में बड़ा संत समागम (Sant Samagam) आयोजित हो रहा है, जिसमें प्रदेश भर से एक हजार से ज्यादा साधु-संत शामिल होंगे. इसमें साधु-संतों से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने रखा जाएगा. वहीं प्रदेश के अध्यात्म मंत्री पीसी शर्मा (Spirituality Minister PC Sharma) के मुताबिक, संत समागम के जरिए सरकार प्रदेश के विकास को लेकर मिलने वाले सुझावों पर अमल करने का काम करेगी.

दरअसल, प्रदेश की सत्ता पर पंद्रह साल बाद वापस लौटी कांग्रेस सरकार बीजेपी के भगवा एजेंडे को हथियाने में लगी है. विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले भी कांग्रेस नेताओं के समर्थन में साधु-संतों ने हठयोग साधना की थी, तो कमलनाथ भी मंदिरों में मत्था टेकते नजर आए थे.

सरकार में आते ही कांग्रेस ने नर्मदा सेवा न्यास का गठन कर कम्प्यूटर बाबा की अध्यक्ष पद पर ताजपोशी की. अब सरकार की कोशिश साधु-संत समाज को खुश कर बड़ी आबादी को साधने की है. इसके लिए सरकार अध्यात्म विभाग के बैनर तले बड़ा संत समागम करने जा रही है, जिसमें सीएम कमलनाथ भी शामिल होंगे. इसमें साधु-संतों और मठ मंदिरों से जुड़े मुद्दों पर मंथन होगा. प्रदेश की कांग्रेस सरकार का ये अब तक का पहला और सबसे बड़ा संत समागम होगा. राजधानी के मिंटो हाल में होने वाले आयोजन में सीएम कमलनाथ के अलावा अध्यात्म मंत्री पीसी शर्मा और विभाग के अफसर भी मौजूद रहेंगे.

संत समागम को लेकर नर्मदा सेवा न्यास के अध्यक्ष कम्प्यूटर बाबा ने कहा है कि 17 सितंबर के आयोजन से पहले साधु-संतों की एक अहम बैठक होगी, जिसमें संतों से मुद्दों के साथ ही प्रदेश के विकास के रोड मेप पर मंथन होगा. इसके बाद इसे 17 सितंबर को सरकार के सामने रखा जाएगा. बीजेपी सरकार में राज्यमंत्री बने कम्प्यूटर बाबा ने चुनाव के ठीक पहले भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस के पक्ष में प्रचार किया था. कम्प्यूटर बाबा का कहना है कि बीजेपी सरकार में धर्म के नाम पर दिखावा था इसलिए उन्हें भरोसा है कि कांग्रेस सरकार में संतों को तवज्जो दी जाएगी.

मध्‍य प्रदेश के अध्यात्म मंत्री पीसी शर्मा ने कहा है कि संत समागम में सरकार साधु-संतों से आशीर्वाद लेने के साथ ही उनके बताए निर्देश पर चलने का काम करेगी. शर्मा ने कहा है कि पहले भी राजा महाराजा संतों के बताए रास्तों पर चलते थे और अब सरकार भी साधु-संतों के सुझाए प्रदेश हित के सुझावों पर अमल करने का काम करेगी.