गया    
पितृपक्ष के तीसरे दिन रविवार को अधिकतर त्रिपाक्षिक श्राद्ध करने वालों ने मोक्षधाम के पंचतीर्थ पर पिंडदान कर पितरों के मोक्ष की कामना की। आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को मानते हुए 17 दिनों का गयाश्राद्ध कर रहे तीर्थयात्रियों की भीड़ सूर्यकुंड और पितामहेश्वर तालाब में उमड़ी। दोनों स्थानों की पांच वेदियों पर कर्मकांड कर पितरों के अक्षयलोक की कामना की। पितामहेश्वर इलाके में स्थित उत्तरमानस वेदी पर सुबह ही तीर्थयात्री जुट गए। यहां पांच कोण वाला पितामहेश्वर सरोवर में पिंडदान किया। पिंडदानियों की जुटी भीड़ के सामने तालाब का परिसर छोटा पड़ गया। हालांकि सुबह प्रतिपदा होने के कारण कुछ पिंडदानियों ने प्रेतशिला, ब्रह्मकुंड और रामशिला वेदी पर पिंडदान किया । त्रिपाक्षिक श्राद्ध करने वालों के अलावा एक, तीन, पांच और सात दिनों तक पिंडदान करने वालों ने भी बुधवार को फल्गु में स्नान कर श्राद्धकर्म की शुरुआत की।

पिंडदान और तर्पण के बाद पिंडदानी पितामहेश्वर से विष्णुपद इलाके में स्थित सूर्यकुंड के लिए निकल पड़े। मेला क्षेत्र देवघाट मुहल्ले के सूर्यकुंड में स्थित उदीचि, कनखल व दक्षिणमानस पर तीर्थयात्रियों ने पिंड अर्पित कर पूर्वजों के स्वर्गलोक प्राप्ति की कामना की। उत्तर मानस पर कर्मकांड के बाद मां शीतला मंदिर में स्थित उतरार्क भगवान सूर्य का दर्शन-पूजन किए। यहां के बाद तीर्थयात्री देवघाट पर पहुंचे। शंकराचार्य मठ की ओर स्थित जिह्वालोल वेदी पर शनिवार की तिथि का अंतिम श्राद्धकर्म किया। इसके बाद विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना कर आवासन को लौट गए। श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के सचिव व गयापाल गजाधर लाल पाठक ने कहा कि द्वितीया तिथि मनाते हुए पिंडदानियों ने पंचतीर्थ श्राद्ध किया। गयापाल महेश लाल गुपुत ने कहा कि त्रिपाक्षिक गयाश्राद्ध कर रहे तीर्थयात्रियों ने रविवार को पितामहेश्व और सूर्यकुंड की वेदियों पर पिंडदान किया। सोमवार को बोधगया में स्थित वेदियों पर कर्मकांड करेंगे। इधर, त्रिपाक्षिक या 17 दिनी पिंडदान करने वाले तीर्थयात्री सोमवार को बोधगया के मातंगवापी, धर्मारण्य वेदी पर कर्मकांड कर सरस्वती नदी में स्नान और तर्पण करेंगे। पिंडदान के बाद महाबोधि मंदिर में भी बोधितरू के दर्शन करेंगे। हालांकि सोमवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया और तृतीया दोनों तिथि होने के कारण कुछ पिंडदानी गया के पंचतीर्थ पितामहेश्वर तालाब और सूर्यकुंड में स्थित वेदियों पर पिंडदान करेंगे।