नई दिल्ली

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए तेजी का इंजेक्शन लगाया है. वित्त मंत्री ने शनिवार को रियल एस्टेट समेत कई और सेक्टर्स के लिए राहत भरे ऐलान किए. सीतारमण की घोषणाओं में रीयल एस्टेट और निर्यात क्षेत्रों को कुल मिला कर 70 हजार करोड़ रुपए से अधिक की वित्तीय मदद देने की योजनाएं शामिल हैं.

घोषणाओं के मुताबिक अधूरी आवास परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी धन मुहैया कराया जाएगा और इसके लिए कोष की स्थापना जैसी योजनाओं के संबंध में 30 हजार करोड़ रुपए के खर्च करने की बात कही गई है. वित्त मंत्री द्वारा ये घोषणाएं ऐसे समय में की गई हैं जब आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार कम होकर 6 साल के निचले स्तर पर आ गई है.

उन्होंने कहा कि निर्माण के आखिरी चरण में पहुंच चुकी साफ-सुथरी अवासीय परियोजनाओं को पूरा कराने में वित्तीय मदद के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का कोष बनाया जाएगा. इसमें करीब 10 हजार करोड़ रुपए सरकार मुहैया कराएगी तथा इतनी ही राशि अन्य स्रोतों से जुटाई जाएगी.

सीतारमण के मुताबिक इस योजना का लाभ उन्हीं परियोजनाओं को मिलेगा जो NPA घोषित नहीं हैं और न ही उनको ऋण समाधान के लिए NCLT के सुपुर्द किया गया है. उन्होंने कहा कि भवन निर्माण के लिए कर्ज पर ब्याज दर में कमी की भी व्यवस्था की गई है.

सीतारमण ने कहा कि धन के अभाव में अंतिम चरण में अटकी आवासीय परियोजनाओं को वित्तीय सहायता कोष की मदद से करीब 3.5 लाख घर खरीदारों को लाभ मिलेगा. बता दें कि इससे पहले सरकार अर्थव्यवस्था में निवेश को गति देने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को अधिक उदार बनाने और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के आपस में विलय के जरिए बड़े बैंक स्थापित करने के भी फैसले कर चुकी है.

उन्होंने बताया कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जनवरी, 2020 से एक नई योजना 'निर्यात उत्पादों पर करों एवं शुल्कों से छूट' (रोडीटीईपी) अमल में लाई जाएगी. यह योजना वाणिज्यिक वस्तुओं के निर्यात संवर्धन की योजना (MEIS) की जगह लेगी. सीतारमण ने कहा कि नई योजना से निर्यातकों को पहले के मुकाबले ज्यादा राहत मिलेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि इस नई योजना से सरकारी राजस्व पर 50 हजार करोड़ रुपए का प्रभाव पड़ सकता है.

इसी कड़ी में उन्होंने आगे कहा कि अभी सरकार निर्यातकों को 40-45 हजार करोड़ रुपए के शुल्कों/करों का रिफंड मुहैया करा रही है. साथ ही निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC) निर्यात ऋण बीमा योजना का दायरे को भी विस्तार दिया जाएगा. सरकार के इस कदम पर सालाना 1,700 करोड़ रुपए की लागत लगेगी.

उन्होंने कहा कि 'निर्यातकों के लिए ऋण' को 'प्राथमिकता क्षेत्र के लिए ऋण' का दर्जा देने का प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक के विचाराधीन है. इससे निर्यातकों को 36,000 करोड़ रुपए से लेकर 68,000 करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त वित्त लाभ मिलेगा.

सीतारमण ने कहा कि वर्तमान में मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और औद्योगिक उत्पादन में सुधार के स्पष्ट संकेत दिख रहे हैं. मुद्रास्फीति 4 फीसदी के लक्ष्य से अच्छी खासी नीचे है.

5 फीसदी की वृद्धि दर पर सीतारमण ने कहा, 'यह एक तिमाही की बात है लेकिन इसके बाद निश्चित ही हम इस पर गौर करने वाले हैं. जो मैंने बजट में कहा उसके साथ इसका मिलान करने वाले हैं और हम यह तय करेंगे कि हम किस जगह और किस स्तर पर हैं.' उन्होंने कहा कि अभी आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार बजट के पूर्वानुमान से भिन्न है.