Friday, July 20th, 2018

देश के एक चौथाई बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं, सर्वे में हुआ खुलासा

भारत की आबादी को एक अरब पार किए हुए काफी वक्त बीत चुका है, लेकिन फिर भी एक चौथाई बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं और देश की बढ़ती जनसंख्या ने बुजुर्गों का अकेलापन दूर करने के लिए अब तक कुछ खास नहीं किया है। दिल्ली के एक गैर सरकारी संगठन एजवेल फाउंडेशन ने देश के 20 राज्यों के 10 हजार बुजुर्गों को लेकर एक सर्वेक्षण किया। इसके मुताबिक 23.44 प्रतिशत यानी देश का का हर चौथा बुजुर्ग देश में अकेला रह रहा है।

आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भर हैं बुजुर्ग
यही नहीं सर्वे में इस बात का भी खुलासा हुआ कि बड़ी संख्या में बुजुर्ग या तो अकेले रहना या फिर अपने जीवनसाथी के साथ रहना पसंद करते हैं। हालांकि अकेले रहकर बुजुर्ग स्वतंत्र तो रहते हैं लेकिन ‘आर्थिक रूप’से उन्हें दूसरों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। एजवेल फाउंडेशन के संस्थापक हिमांशु रथ कहते हैं, हर बुजुर्ग को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाए जाने की जरूरत है ताकि जरूरत पड़ने पर वे अपने लिए देखभाल का इंतजाम कर सकें। इसके लिए परिवार, समुदाय और सरकार को हर स्तर पर प्रयास करना चाहिए।

सर्वे की 3 बड़ी बातें
23.44 फीसदी (हर चौथा) बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं
48.88 फीसदी (हर दूसरे) बुजुर्ग अपने जीवनसाथी के साथ रह रहे हैं
26.5 फीसदी बुजुर्ग बच्चों या परिवार के अन्य सदस्य के साथ रह रहे हैं

शहर बनाम गांव
25.3 फीसदी बुजुर्ग शहरों में अकेले रह रहे हैं
21.38 फीसदी बुजुर्ग गांवों में अकेले रह रहे हैं

बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करता है ध्यान

आजादी कितनी हासिल
36.81 फीसदी बुजुर्ग उम्र के इस पड़ाव में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं।
68.24 फीसदी बौद्धिक स्वतंत्रता महसूस कर पा रहे हैं।
60.54 फीसदी बुजुर्ग मनोवैज्ञानिक तौर पर आजादी महसूस करते हैं।
69.54 फीसदी सामाजिक स्वतंत्रता महसूस करते हैं।
61.81 फीसदी बुजुर्ग शारीरिक तौर पर आत्मनिर्भर हैं।

सबसे ज्यादा जरूरी क्या
88.5 फीसदी बुजुर्गों को लगता है कि इस उम्र में स्वास्थ्य सेवाएं सही से मिलें तो उनकी आजादी भी बरकरार रहेगी।

Source : Agency

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