सतना
सतना (satna)से अगवा (kidnap) किया गया किसान अवधेश समदड़िया (awadhesh samdadiya)सुरक्षित घर पहुंच गए हैं. अवधेश आज सुबह 4 बजे अचानक अपने घर लौट आए. पिछले शनिवार को बबली कोल गिरोह (babli koal)ने उनका अपहरण किया था और फिरौती में 50 लाख रुपए मांग रहा था.

पुलिस का दावा-अवधेश समदड़िया ने तड़के जैसे ही घर पहुंचे उनके परिवार की खुशी का ठिकाना ना रहा. सूत्रों से पता चला है कि गिरोह ने 6 लाख की फिरौती वसूली है. हालांकि पुलिस का दावा है कि दबाव बढ़ने के कारण डकैत गिरोह ने अवधेश को छोड़ा है.

घर से किया था अपहरण-विंध्य इलाके में दहशत का पर्याय बन चुके बबली कोल गिरोह ने पिछले शनिवार को किसान अवधेश समदड़िया को उनके घर से उठा लिया था. डकैतों ने रात दो बजे घर पर धावा बोला और अवधेश के नौकर को बंदूक की नोक पर अपने कब्ज़े में ले लिया. डकैतों के कहने पर नौकर ने घर की कुंडी खटखटायी तो अवधेश ने दरवाज़ा खोल दिया. दरवाज़ा खुलते ही डकैतों ने अवधेश को अगवा कर लिया.

अगवा करने के बाद बबली कोल गिरोह ने परिवार से 50 लाख की फिरौती मांगी थी. गिरोह बार-बार फोन कर घरवालों को फिरौती के लिए धमका रहा था. लेकिन पुलिस डकैतों को पकड़ नहीं पा रही थी.

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की 12 पुलिस टीम तलाश में लगायी गयी थीं. मानिकपुर से सटे जंगल नन्ही चिरैया में डकैतों की आखिरी लोकेशन मिली थी. डकैत लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे. पुलिस डकैतों और किसान का सुराग नहीं लगा पायी.

सतना विंध्य इलाके का पिछड़ा हुआ इलाका है. साथ ही ये उत्तर-प्रदेश की सीमा पर बसा है. सतना बड़ा रेलवे जंक्शन भी है. बदमाशों और डकैतों के लिए ये मनमाफिक जगह है. अपराधी अपराध कर आसानी से एक से दूसरे प्रदेश में भाग जाते हैं.इसलिए इस इलाके में अपराध और ख़ासतौर से अपहरण उद्योग बन गया है. तीन साल में यहां हज़ार से ज़्यादा लोगों को अपहऱण हो चुका है.इनमें से 721 बच्चे हैं.

सतना ज़िले के लोगों को सबसे ज़्यादा अपहऱण का अपराध डरा रहा है. अपहरण के साथ-साथ लापता होने के केस भी सतना में बहुत ज़्यादा हैं. लापता या अपहरण किए गए कुछ लोग सकुशल लौट आए या मुक्त करा लिए गए लेकिन बाक़ी का बरसों बाद भी पता नहीं चल पाया. अपहरण और गुमशुदगी के मामले में सबसे ज़्यादा शिकार मासूम हैं. अपहरण के बाद हत्या के केस भी सतना में हुए जिनसे पूरा समाज दहला रहा.

सतना जिले के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों से बड़ी संख्या में बच्चे लापता हैं. तीन साल में ये संख्या पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 721 है. जिले के विभिन्न थानों में आई पी सी की धारा 363 के तहत मामला दर्ज हैं. लेकिन इनका आज तक कोई सुराग नहीं मिला. पुलिस भी इन मामलों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रही और परिवार पुलिस थानों और आलाधिकारियों के दरवाजे के चक्कर काट कर धक हार चुके हैं.कुछ ऐसे भी परिवार हैं, जिनके बच्चों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गयी. दो मासूम जुड़वा बच्चों के अपहरण और हत्या का मामला तो आज भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है.

सतना ज़िले के चित्रकूट में 12 फरवरी को प्रियांश और श्रेयांस जुड़वा मासूमों के अपहऱण और हत्याकांड को लोग भूले नहीं हैं. उनके ट्यूशन टीचर रामकेश यादव ने बच्चों का अपहरण कर हत्या कर दी थी. बाद में रामकेश ने सतना जेल में आत्महत्या कर ली. उस केस में पुलिस की नाकामी सबके सामने थी.