खण्डवा
नर्मदा में लगातार बढ़ते बहाव ने अब चिंता बढ़ा दी है। यहाँ पिछले चौबीस घंटो में जलराशि करीब ड्योढ़ी हो गई है जिससे निचली बस्तियों में बाढ़ का ख़तरा मंडराने लगा है। इन्दिरा सागर बांध के 12 गेट अब साढ़े छह मीटर तक खोल दिए गए है जिससे यहाँ से 20800 क्यूमेक्स जलराशि डिस्चार्ज हो रही है और इसी तरह ओम्कारेश्वर बांध के 18 गेट्स से अब 23000 क्यूमेक्स पानी बह रहा है। इससे अब खण्डवा इंदौर मार्ग पर नर्मदा पर बने मोरटक्का पुल को पानी छूने की स्थिति में आ गया है। परसो रात से इस पुल पर यातायात बंद करने से यात्रियों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

इन्दिरा सागर परियोजना प्रमुख अनुराग शेठ ने बताया कि नर्मदा के कछार में लगातार भारी बारिश के कारण बरगी -तवा सहित नर्मदा पर बने कई छोटे-छोटे बांध गेट से पानी छोड़ा जा रहा है और यह अथाह जलराशि बहकर इंदिरासागर जलाशय में मिल रही है जो देश का सबसे बड़ा जलाशय है जिसकी भरण क्षमता 12.22 बिलियन क्यूबिक मीटर है। यह जलाशय अपनी पूर्ण क्षमता तक भर चुका है इसलिए अतिरिक्त जलराशि निकालने के लिए इसके 12 गेट अब साढ़े छह मीटर तक खोल दिए गए है जिससे यहाँ से 20800 क्यूमेक्स या क्यूसेक के टर्म में कहे तो 7,30,000 क्यूसेक जलराशि डिस्चार्ज हो रही है। इस बांध के गेट्स के साथ ही पॉवर हॉउस से भी लगातार डिस्चार्ज हो रहा है। गत 17 अगस्त से यहाँ स्थापित 125 मेगावॉट की आठ टर्बाइन से लगातार 1000 मेगावॉट विद्युत् उत्पादन किया जा रहा है। यहाँ की जलराशि बहकर ओम्कारेश्वर बांध में जा रही है और यहाँ भी 18 गेट्स खोलकर 23000 क्यूमेक्स पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है।

इन्दौर -इच्छापुर स्टेट हाईवे पर नर्मदा पर बने मोरटक्का पुल पर अब भी यातायात शुरू नहीं हो सका है। इससे खण्डवा और इंदौर के बीच सड़क संपर्क टूट गया है ,हालाँकि वैकल्पिक मार्ग के तौर पर एक्वाडक्ट पर से वाहन निकाले जा रहे है लेकिन यह सिर्फ छोटे वाहनों के लिए ही संभव है। दूसरा वैकल्पिक मार्ग देशगांव से भिखनगांव होते हुए जाता है लेकिन इससे दूरी काफी बढ़ जाती है। इधर रेल मार्ग से खण्डवा का इंदौर से संपर्क पहले ही टूट चुका है ,मीटरगेज लाईन को ब्रॉडगेज में तब्दील किये जाने के कार्य के चलते। खण्डवा और इंदौर के संपर्क टूटने से इसका व्यापक प्रभाव खण्डवा के व्यापार-व्यवसाय पर पड़ रहा है। खण्डवा में हालाँकि बारिश रिमझिम ही हो रही है लेकिन नर्मदा में बहाव बढ़ने से ये हालात बन रहे है।