नई दिल्ली 
पितरों को याद करने और उनका तर्पण करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध के लिए 15 दिन का समय तय किया गया है। पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा और आश्विन माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होते हैं। इस साल आश्विन प्रतिपदा यानी 13 सितंबर से पितृपक्ष शुरू हो रहा है। इस बार 14 को प्रतिपदा और 15 सितम्बर को द्वितीया का श्राद्ध होगा और 28 सितम्बर को सर्व पितृ अमावस्या का श्राद्ध होगा। 16 को मध्याह्न तिथि न मिलने के कारण श्राद्ध नहीं होगा। 

उत्थान ज्योतिष संस्थान के ज्योतिर्विद पं.दिवाकर त्रिपाठी 'पूर्वांचली' के अनुसार पितृपक्ष का मान प्रतिपदा से अमावस्या तक है। इस बार दशमी और एकादशी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन होगा। 

दशमी और एकादशी का श्राद्ध एक ही दिन
पूर्वांचली के अनुसार पितृपक्ष में दशमी और एकादशी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन होगा। क्योंकि 24 सितंबर, मंगलवार को सूर्योदय 6 बजे होगा। दशमी तिथि दिन में 11:42 तक व्याप्त रहेगी उसके बाद एकादशी लग जाएगी। इसलिए मध्य समय में दोनों तिथियों का योग होने से श्राद्ध एक ही दिन होगी।  

पितृदोष दूर करने के लिए करें ये उपाय
पितृदोष दूर करने के लिए घर में गीता पाठ कराएं। प्रत्येक अमावस्या ब्राह्मण को भोजन अवश्य कराएं। भोज में पूर्वजों की मनपसंद वस्तुएं बनाएं। खीर बनाएं। घर में वर्ष में एक दो-बार हवन अवश्य कराएं। पानी में पितृ का वास माना गया है और पीने के पानी के स्थान पर उनके नाम का दीपक जलाएं। सुबह-शाम परिवार के सभी लोग मिलकर सामूहिक आरती करें। माह में एक या दो बार उपवास रखें। श्राद्धपक्ष में पीपल वृक्ष पर अक्षत, तिल व फूल चढ़ाकर पूजा करें।

श्राद्ध की तिथियां

13 सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध, 
14 को प्रतिपदा
15 को द्वितीया का श्राद्ध होगी। 
16 को मध्याह्न तिथि न मिलने के कारण श्राद्ध नहीं होगा। 
  इसी क्रम में 17 को तृतीया, 
18 को चतुर्थी, 
19 को पंचमी, 
20 को षष्ठी, 
21 को सप्तमी, 
22 को अष्टमी, 
23 को मातृ नवमी, 
24 को दशमी और एकादशी दोनों तिथि का श्राद्ध होगा। 
25 को द्वादशी, 
26 को त्रयोदशी, 
27 को चतुर्दशी, 
28 को अमावस्या का श्राद्ध के साथ पितृ विसर्जन होगा।