आज के दौर में लड़के-लड़कियां शादी को लेकर जल्दबाजी नहीं दिखाते हैं। यहां तक कि पैरंट्स भी पहले बच्चों के अच्छे से सेटल हो जाने का इंतजार करते हैं और फिर उनके लिए रिश्ता तलाशते हैं। इससे मैरिड कपल को ज्यादा बेहतर जीवन जीने में सहायता मिलती है। लेकिन बात प्रेग्नेंसी की हो तो इसके लिए एक उम्र के बाद महिलाओं को कंसीव करने में बहुत ज्यादा दिक्कत आने लगती है। कंसीव हो भी जाए तो मिसकैरेज से लेकर स्टिलबर्थ का खतरा बढ़ जाता है।

20-29
20 से लेकर 30 साल की उम्र को प्रेग्नेंसी के लिए बेस्ट पीरियड माना जाता है। इस ऐज ग्रुप की महिलाओं में प्रेग्नेंसी से जुड़ी समस्याओं के सामना करने की आशंका काफी कम होती है। इस उम्र में महिला के शरीर में सबसे ज्यादा स्वस्थ अंडे होते हैं, जिससे कंसीव करने का सक्सेस रेट ज्यादा होता है।

30-39
30 के ऐज ग्रुप में एंटर करते हुए महिला के शरीर में मौजूद अंडों की संख्या कम होने लगती है। महिला के शरीर में करीब 10 लाख अंडे होते हैं, जो प्यूबर्टी तक आते हुए 3 लाख ही रह जाते हैं। इनमें से 300 से 400 ही ऐसे होते हैं जो प्रेग्नेंसी में सफल हो सके। 37 की उम्र तक सिर्फ 27,000 अंडे ही रह जाते हैं ऐसे में कंसीव करने का प्रतिशत बहुत कम रह जाता है।


इस ऐज ग्रुप में यदि महिला कंसीव कर भी लेती है तो उसे कई तरह की मेडकिल प्रॉब्लम्स हो सकती हैं जो कोख में पलने वाले बच्चे के विकास पर असर डालता है। इतना ही नहीं इस ऐज ग्रुप में कंसीव करने पर गर्भपात की आशंका भी ज्यादा होती है।

एक स्टडी के मुताबिक इस ऐज ग्रुप में यदि महिला तीन महीने तक कंसीव करने का प्रयास करे तो उसका सक्सेस रेट सिर्फ 7 प्रतिशत ही होता है। यदि वह प्रेगनेंट हो भी जाती है तो उसके और बच्चे के कई तरह के हेल्थ रिस्क में पड़ने की आशंका होती है। इन खतरों में गर्भपात, समय से पहले डिलिवरी, बच्चे का कम वजन, बच्चे में जन्म से ही कई बीमारियां, जन्म के समय बच्चे की मौत शामिल हैं। इस उम्र में कंसीव करने वाली महिलाओं में बीपी व शुगर की समस्या आम होती है जो मिसकैरेज के खतरे को दोगुना बढ़ा देता है।