लखनऊ 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोतीनगर स्थित राजकीय बाल गृह (बालिका) में पर्याप्त कमरे न होने से कर्मचारी और बालिकाएं परेशान हैं। स्थिति यह है कि चार कमरों में जैसे-तैसे 79 बालिकाएं रह रही हैं। इतना ही नहीं यहां के कर्मचारियों को तीन माह से वेतन भी नहीं मिला है। यही हाल कई संस्थानों का है। नगर मैजिस्ट्रेट गिरजेश चौधरी ने शुक्रवार को बाल गृह का निरीक्षण किया तो यह सच सामने आया। 

डीएम कौशलराज शर्मा के निर्देश पर सिटी मैजिस्ट्रेट और सभी एसीएम ने राजधानी के बाल गृहों और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से चलाए जा रहे शरणालयों का निरीक्षण किया। सिटी मैजिस्ट्रेट ने मोतीनगर स्थित बाल गृह (बालिका) का निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि संस्थान में चार कमरों में किसी तरह 79 बालिकाएं रह रही हैं। इसके अलावा संस्थान में कार्यरत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी संविदाकर्मियों को 3 माह से वेतन भी नहीं मिला है। 

किचन और टॉइलट में थी काई 
एसीएम पंचम ने अलीगंज स्थित स्वैच्छिक संस्थान श्रीराम औद्योगिक अनाथालय का निरीक्षण किया। यहां खेलकूद के मैदान में घास उगे पाए गए। वहीं किचन और टॉइलट में काई लगी पाई गई। परिसर में भी पर्याप्त साफ सफाई नहीं थी। सिक्यॉरिटी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाने की जरूरत बताई गई। 

बजट के अभाव ने बढ़ाई मुश्किलें 
एसीएम षष्ठम ने मोहान रोड स्थित राजकीय बाल गृह विशेषीकृत (बालक/बालिका) का निरीक्षण किया। संस्था में 108 बालक और 41 बालिकाएं हैं। बाल गृह की अधिक्षिका ने बताया कि लम्बे समय से बजट न मिलने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 

यहां दुरुस्त मिलीं व्यवस्थाएं 
एसीएम पंचम ने सीतापुर रोड स्थित स्वैच्छिक संस्था गंगोत्री शिशु गृह, मोहन रोड के राजकीय बाल गृह (बालक), एसीएम षष्ठम ने मोहान रोड स्थित राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर), एसीएम सप्तम ने जानकीपुरम स्थित स्वैच्छिक संस्था, दृष्टि और सिटी मैजिस्ट्रेट ने राजकीय महिला शरणालय प्राग नारायण रोड का निरीक्षण किया। प्रशासनिक अफसरों को यहां की सभी व्यवस्थाएं बेहतर मिलीं। 

वहीं इस पूरे मामले पर जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने कहा कि सभी गृहों में कोई गंभीर अव्यवस्था नहीं मिली है। जो भी समस्याएं सामने आई हैं, उसके लिए सभी संस्थानों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। एक सप्ताह में कमियों को दूर कर लिया जाएगा।