नई दिल्ली  
एम्स में जेटली का इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि जेटली जीवंत व्यक्ति थे और वे दर्द में भी मुस्करा देते थे। एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि वे गंभीर रूप से बीमार थे बावजूद इसके उनमें जीने की अद्भुत क्षमता थी। वे दर्द में भी हंसते रहे।

गुलेरिया ने बताया कि जैसे-जैसे उनके अंगों ने काम करना बंद किया वे अशक्त होते चले गए। उन्हें मशीनों पर रखा गया। बावजूद इसके वे जब होश में आते थे तो मंद-मंद मुस्करा कर ही जबाव देते थे।

आंखों में थे आंसू : दरअसल, इसके पहले भी जेटली का एम्स में उपचार किया जा चुका है। उस वक्त उन्होंने मरीजों को ठंड शीतल पेयजल मुहैया कराने के लिए कहा था। उसके बाद मरीजों की सुविधा के लिए यहां पांच से अधिक कूलिंग मशीन लगाई गईं थी जिसका रखरखाव वे अपने वेतन से ही करवाते थे। आईसीयू वार्ड से जब उनके पार्थिव शरीर को जरूरी औपचरिकताओं के लिए रसायनिक आलेपन के लिए शव विच्छेदन कक्ष की तरफ ले जाया जा रहा था वहां पहले से ही भारी संख्या में लोग खड़े थे।
 
सायं करीब 5 बजे उनके पार्थिव शरीर को दक्षिण दिल्ली आवास पर ले जाया गया। इस मौके पर एम्स के डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, मरीज व उनके रिश्तेदारों की आंखें भी नम थीं।

बाहर से आई टीम ने किया था गुर्दे का प्रत्यारोपण
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली इससे पहले भी कई बार एम्स में भर्ती हो चुके हैं। पिछले वर्ष 14 मई 2018 को एम्स में उनका किडनी प्रत्यारोपण हुआ था। इन प्रत्यारोपण के लिए आई टीम में एम्स के अलावा कई और अस्पतालों के डॉक्टर भी मौजूद थे। इनमें दिल्ली अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. संदीप गुलेरिया के अलावा दो वरिष्ठ डॉक्टर पीजीआई चंडीगढ़ के भी थे। जनवरी 2019 में पूर्व वित्त मंत्री को सारकोमा में सॉफ्ट टिश्यू मिले थे, जिसे लेकर उन्हें न्यूयॉर्क के डॉक्टरों की सलाह लेनी पड़ी थी। इसके बाद से उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था। डॉक्टरों के कहने पर वे कई महीनों से आइसोलेशन में रह रहे थे। बाहर आने-जाने को लेकर भी डॉक्टरों ने उन्हें खास हिदायत दे रखी थी।