बिलासपुर
 प्रदेश के शिक्षा विभाग और आदिम जाति कल्याण विभाग के तहत संचालित स्कूलों में चार हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती अब हाईकोर्ट के अंतिम फैसले से बाधित रहेगी। राज्य शासन ने इन पदों के लिए विज्ञान विषय के साथ हायर सेकेंडरी पास करने वाले अभ्यर्थियों से आवेदन मंगाए गए थे, इसे कला विषय में हायर सेकेंडरी करने वालों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। लोक शिक्षण संचालनालय ने 9 मार्च को प्रदेश के शिक्षा विभाग और आदिम जाति कल्याण विभाग के तहत संचालित स्कूलों में सहायक शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया।

इसके लिए विज्ञान विषय के साथ हायर सेकेंडरी परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकते थे, इस नियम के कारण कला विषय के साथ हायर सेकेंडरी परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थी फॉर्म नहीं भर सके। फार्म भरने से वंचित रहने वाले बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, महासमुंद, कबीरधाम, मुंगेली, रायगढ़, रायपुर, बलौदा बाजार-भाटापारा सहित अन्य जिलों के 23 अभ्यर्थियों ने एडवोकेट ईशान वर्मा और घनश्याम कश्यप के जरिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। मामले पर शुक्रवार को चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जस्टिस पीपी साहू की बेंच में सुनवाई हुई।

 याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि प्राथमिक शिक्षा के वर्तमान पाठ्यक्रम में हिंदी, अंग्रेजी, गणित व पर्यावरण विषय शामिल है, लिहाजा कक्षा पहली से पांचवीे तक के स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए विज्ञान विषय अनिवार्य नहीं है। कला विषय से हायर सेकेंडरी करने वाले भी इन पदों पर चयन और नियुक्ति के लिए पात्रता रखते हैं। प्रारंभिक सुनवाई के बाद चार हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती को हाईकोर्ट के अंतिम फैसले से बाधित रखा गया है। साथ ही संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।