पटना  
राजधानी में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव का काम भी दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को मिल सकता है। इस पर गंभीरता से मंथन हो रहा है। इसके लिए अभी करार तो नहीं हुआ है लेकिन तर्क यह है कि पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लि. (पीएमआरसीएल) को अभी ऑपरेशन और मेंटेनेंस का अनुभव नहीं है। सो शुरुआत में इसे डीएमआरसी को दे दिया जाए। मेट्रो प्रोजेक्ट के निर्माण का काम पहले ही डीएमआरसी को दिया जा चुका है।

पटना मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के तहत 31.94 किलोमीटर लंबे दो कॉरिडोर का निर्माण होना है। दोनों कॉरिडोर का पूरा काम डीएमआरसी को देने पर राज्य सरकार स्तर पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। पीएमआरसी  बोर्ड भी इसे हरी झंडी दे चुका है। राज्य कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही डीएमआरसी और पीएमआरसी के बीच करार हो जाएगा। हालांकि डीएमआरसी ने काम की शुरुआत कर दी है।

2024 तक पूरा किया जाना है
मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को पांच साल यानी वर्ष 2024 तक पूरा किया जाना है। निर्माण पूरा होते ही इसके संचालन और रखरखाव का काम भी डीएमआरसी संभाल सकता है। डीएमआरसी के पास इस काम का अनुभव भी है। ऐसे में विचार हो रहा है कि पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के सक्षम होने तक संचालन और रखरखाव भी डीएमआरसी से कराया जाए। अगर यह फैसला होता है तो इसके लिए पीएमआरसीएल और डीएमआरसीएल के बीच अलग से करार होगा।

सर्वे शुरू करने को देखे दोनों कॉरिडोर
पटना मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के दोनों कॉरिडोर के एलाइनमेंट के ड्रोन सर्वे की प्रक्रिया शुक्रवार को शुरू हो गई। पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने सर्वे करने वाली टीम को दोनों कॉरिडोर दिखाए। ड्रोन सर्वे का काम 15 अक्टूबर तक पूरा किया जाना है। इस बीच पीएमआरसीएल और डीएमआरसीएल के बीच अनुबंध भी हो जाएगा।