उज्जैन
पीएम नरेन्द्र मोदी के काशी ड्रीम प्रोजेक्ट की तर्ज पर अब उज्जैन और महाकाल मंदिर का विकास भी किया जाएगा. श्रद्धालुओं को यहां बेहतरीन सुविधाएं मुहैया करायी जाएंगी ताकि वो सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि सैर-सपाटे के लिए आएं और कुछ दिन उज्जैन में ठहरें. सरकार इसके लिए 300 करोड़ रुपए का बजट पहले ही तय कर चुकी है.

सोमवार को बाबा की महाकाल शाही सवारी में शामिल होने आए सीएम कमलनाथ ने मंदिर के विकास के लिए 300 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था. आज सरकार के 3 मंत्री और चीफ सैक्रेट्री उज्जैन पहुंचे. लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, आध्यात्म मंत्री पीसी शर्मा और नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह उज्जैन आए. उन्होंने यहां कलेक्टर कमिश्नर सहित पुलिस अफसरों के साथ बैठक की. इन लोगों ने महाकाल मंदिर में दर्शनार्थियों की सुविधा और मंदिर के विकास के बारे में चर्चा की. व्यवस्था में सुधार और दर्शनार्थी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए 300 करोड़ रु खर्च किए जाएंगे.

समित सदस्यों ने इस बात पर विचार किया कि महाकाल के दर पर वीआईपी कल्चर ख़त्म किया जाए. वीआईपी दर्शन अब सिर्फ सुबह 6 से 7 और शाम को 3 से 4 के बीच ही किए जाएं. त्यौहार के दिन वीआईपी दर्शन बंद रहेंगे. मोदी ने जिस तरह से काशी को क्योटो बनाने का प्लान किया है और मंदिर के विकास के लिए जो पद्धति अपनाई गयी है वही महाकाल मंदिर के विकास के लिए अपनाई जाए. एक टीम काशी और सोमनाथ मंदिर जाएगी.

महाकाल मंदिर के सामने और पीछे की ज़मीन अधिकृत की जाएगी. सब तय समय पर होता रहा तो सितंबर में काम शुरू हो सकता है. इसके लिए मंदिर एक्ट में संशोधन किया जाएगा. सितंबर अक्टूबर तक महाकाल मंदिर का नया एक्ट आ जाएगा.अप्रैल 2020 तक क्षिप्रा नदी में में मिलने वाले गंदे नालों को बंद करने का प्लान है.