भोपाल
 मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद मीसा बंदियों की पोंशन रोकने के लिए कहा गया था। सरकार ने दावा किया था कि मीसाबंदियों के नाम पर पैसों की बंदर बाट हो रही है। जिसकी जांच करवाई जाएगी फिर पेंशन शुरू की जाएगी। फिलहाल जांच तो किसी तरह की सामने नहीं आई है लेकिन पेंशन दोबारा शुरू कर दी गई है। बाताया जा रहा है पहले चरण में दो हज़ार मीसाबंदियों को पेंशन देना शुरू किया गया है। मीसाबंदियों में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वरिष्ठ नेता कैलाश सारंग भी शामिल हैं।

दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में जब आपातकाल लगाया गया था तब इसका विरोध करने वालों को बंदी बनाया गया था। मध्य प्रदेश के भी हज़ारों नेताओं को जेल में बंदी बनाया गया था। जब कमलनाथ सरकार सत्ता में आई तो जांच की बात कहकर इस पर रोक लगादी गई थी। लेकिन अब सरकार ने इसे फिर से शुरू कर दिया है। कांग्रेस सरकार ने कहा था कि मीसाबंदियों के नाम पर पेंशन लेने वालों का सत्यापन कराया जाएगा। बताया जा रहा है सरकार को कोई भी मीसाबंदी अपात्र नहीं मिला है। इसलिए सरकार ने रोकी हुई पेंशन के साथ ही उसका एरियर भी जारी किया है। मीसाबंदियों की इस लिस्ट में पार्टी के वेटरन लीडर कैलाश सारंग, सरताज सिंह, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, थावरचंद गहलोत, तपन भौमिक, अजय विश्नोई भी शामिल हैं।

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान साल 1975 से 1977 के बीच लगी इमरजेंसी में जेल में डाले गए लोगों को मीसाबंदी पेंशन योजना के तहत मध्य प्रदेश में करीब 4000 लोगों को 25,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाती है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने साल 2008 में इस योजना की शुरुआत की थी।