गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो अपने चिकित्सीय गुणों की वजह से दवा के रूप में इस्तेमाल की जाती है। गिलोय की पत्तियां, फूल, जड़ और तना सबकुछ ही औषधीय गुणों से भरपूर है और हर तरह से फायदेमंद भी। गिलोय के औषधीय गुणों की वजह से इसे अमृत के रूप में जाना जाता है। इसकी पत्तियां हार्ट के शेप की होती है जिस वजह से इसे heart-leaved moonseed भी कहा जाता है। यहां जानें, गिलोय के फायदों के बारे में....

​डेंगू में रामबाण है गिलोय
गिलोय बुखार और दूसरे रोगों का इलाज करता है क्योंकि इसकी प्रकृति ज्वरनाशक है, इसलिए यह जीवन को खतरे में डालने वाली बीमारियों के संकेतों और लक्षणों को कम करता है। यह खून में प्लेटलेट्स की गिनती को बढ़ाता है और डेंगू बुखार के लक्षण को दूर करने में तो रामबाण माना जाता है। गिलोय के साथ तुलसी के पत्ते प्लेटलेट्स की गिनती को बढ़ाते हैं और डेंगू से लड़ते हैं।

​वेट लॉस में मददगार
गिलोय का जूस इम्यूनिटी और मेटाबॉलिज्म को बढ़ाकर वजन घटाने में मदद करता है। गिलोय, हमारी गट हेल्थ यानी पाचन क्षमता को भी बेहतर करता है जिससे वेट लॉस करना आसान हो जाता है। मोटापा कम करने के लिए गिलोय और त्रिफला के चूर्ण को सुबह और शाम शहद के साथ खाएं। इसके नियमित सेवन से मोटापे में फायदा मिल सकता है।

​शहद के साथ गिलोय जूस
अगर आप वेट लॉस के लिए गिलोय के जूस का सेवन करना चाहते हैं तो आधे ग्राम गिलोय के जूस में एक चम्मच शहद मिलाएं और इस मिश्रण को हर दिन सुबह खाली पेट पिएं। आप चाहें तो इसे बटरमिल्क यानी छाछ के साथ भी पी सकते हैं। ऐसे करने से आपको वजन घटाने में मदद मिलेगी।

​जरूरी बात का रखें ध्यान
गिलोय 5 साल की उम्र या इससे ऊपर के बच्चों के लिए सुरक्षित है। हालांकि, गिलोय की खुराक दो सप्ताह से ज्यादा या बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के नहीं ली जानी चाहिए। अगर आप डायबीटीज की दवाई ले रहे हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह के इस जड़ी बूटी का सेवन न करें। गिलोय कब्ज और कम रक्त शर्करा की समस्या भी पैदा कर सकता है। गर्भवती महिलाओं को इसके इस्तेमाल के लिए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।