गर्दन में दर्द की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। शरीर का पॉस्चर ठीक न होने की वजह से गर्दन की मांसपेशियों र्में ंखचाव आ जाता है। कंप्यूटर के लगातार बढ़ते प्रचलन ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि लोग लगातार घंटों कंप्यूटर पर झुककर काम करते रहते हैं। समय रहते उपचार न कराया जाए, तो सर्वाइकल पेन केवल गर्दन तक ही सीमित नहीं रहता है, बल्कि शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल जाता है। सर्वाइकल यानी गर्दन में दर्द की शिकायत करने वालों की संख्या आजकल तेजी से बढ़ रही है। इसे नजरअंदाज किया गया, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। इससे बचाव के बारे में बता रहे हैं मनोज शर्मा

सर्वाइकल पेन
गर्दन में दर्द की समस्या को डॉक्टरी भाषा में सर्वाइकल पेन कहते हैं। गर्दन से होकर गुजरने वाली सर्वाइकल स्पाइन के जोड़ों और डिस्क में समस्या होने से सर्वाइकल पेन हो जाता है। ऐसा हड्डियों और कार्टिलेज में टूट-फूट होने से होता है। उम्र बढ़ने के अलावा कई और कारण जैसे गर्दन में चोट लग जाना, लिगामेंट्स कड़े हो जाना, शारीरिक सक्रियता की कमी, अपनी गर्दन को असुविधाजक स्थिति में लंबे समय तक होल्ड करना आदि भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं। कुछ लोगों को सर्वाइकल के कारण गर्दन में इतना तेज दर्द होता है कि उन्हें रोजमर्रा के अपने कार्य करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।  इसके अलावा इसके और भी कारण हो सकते हैं।

क्या हैं लक्षण
’गर्दन की मांसपेशियां में कड़ापन हो जाना और उनमें खिंचाव आना।
’गर्दन में दर्द होना।
’दर्द तब और बढ़ जाता है, जब गर्दन को लंबे समय तक एक ही स्थिति में होल्ड कर के रखें। जैसे ड्रार्इंवग या कंप्यूटर पर काम करना आदि।  
’हाथों, पैरों और पंजों में झुनझुनी, सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना।
’सिर के पिछले भाग और कंधों में दर्द होना।
’शरीर का संतुलन बनाने और चलने में परेशानी होना।
’मांसपेशियों में ऐंठन।
’ब्लैडर और बाउल पर नियंत्रण न रह पाना।

क्या हैं कारण
’कंप्यूटर और मोबाइल के लगातार इस्तेमाल से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाना।
’पढ़ते या काम करते समय गर्दन का पॉस्चर सही न रखना।
’उम्र बढ़ने के साथ गर्दन के जोड़ों में
टूट-फूट होना।
’ऑस्टियोआथ्र्राइटिस के कारण गर्दन की हड्डियां क्षतिग्रस्त हो जाना।
’दुर्घटना या चोट लगने के कारण मांसपेशियों और ऊतकों में खिंचाव आ जाना या कशेरुकाएं विकृत हो जाना।

...तो डॉक्टर से संपर्क करें

अधिकतर गर्दन के दर्द नियमित रूप से व्यायाम करने और अपना पॉस्चर सही रखने से ठीक हो जाते हैं। अगर न ठीक हो, तो डॉक्टर को दिखाएं।
’दर्द बढ़ जाए, तो डॉक्टर को दिखाएं।
’बिना आराम के दर्द लगातार कई दिनों तक बना रहे, तो डॉक्टर को दिखाएं।
’दर्द गर्दन से बांहों और पैरों तक फैल जाए, तो डॉक्टर को दिखाएं।
’सिर दर्द, कमजोरी, हाथों और पैरों में सुन्नपन और झुनझुनी आ जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

क्या हैं उपचार
सर्वाइकल पेन की समस्या मामूली है, तो उसे जीवनशैली में बदलाव लाकर ठीक किया जा सकता है, लेकिन स्थिति गंभीर होने पर आर्थोपेडिक सर्जन
या स्पाइन सर्जन को दिखाएं। इसे एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई के द्वारा आसानी से पहचाना जा सकता है और इसे उपचार के द्वारा ठीक भी किया जा सकता है।

दवाएं और इन्जेक्शन
क्षतिग्रस्त तंत्रिकाओं के कारण होने वाले दर्द, ऊतकों की सूजन और मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने के लिए कई दवाएं बताई जाती हैं। दर्द को कम करने के लिए स्टेरॉयड के इन्जेक्शन दिए जाते हैं।

सर्जरी
फिजिकल थेरेपी और दवाओं से भी सर्वाइकल पेन ठीक नहीं होता है, तो सर्जरी की सलाह दी जाती है।

कैसे बचें
’बैठते, चलते, कंप्यूटर पर काम करते समय अपना पॉस्चर सही रखें।
’नियमित रूप से व्यायाम करें।
’मोबाइल फोन को अपने कान और कंधे के बीच में फंसाकर बात न करें।
’मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल से बचें।
’हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन पर्याप्त मात्रा में करें।
’सोने के लिए सही तकिए का इस्तेमाल करें।

फिजिकल थेरेपी
फिजिकल थेरेपी में गर्दन के दर्द के कड़ेपन को दूर करने के लिए विशेषज्ञ की देखरेख में कुछ खास तरह के व्यायाम कराए जाते हैं। गर्दन के दर्द को दूर करने के लिए सही पॉस्चर के बारे में बताया जाता है।

स्पाइनल ट्युबरकलोसिस
कशेरुकाओं के क्षतिग्रस्त होने और हड्डियों में फ्रैक्चर होने के कारण स्पाइन का संक्रमण हो सकता है। स्पाइनल ट्युबरकलोसिस के कारण एक से अधिक कशेरुकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। स्पाइन कॉलम विकृत होने से कई स्पाइनल विकृतियां हो सकती हैं। स्पाइनल ट्युबरकलोसिस के कारण स्पाइनल कैनाल भी संकरी हो सकती है, जिससे तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याएं हो जाती हैं। अगर समय रहते इसका उपचार न कराया जाए, तो स्पाइनल कॉर्ड के दबने से शरीर का निचला भाग लकवाग्रस्त हो सकता है।    

स्पाइनल कॉर्ड का ट्यूमर
स्पाइनल ट्यूमर स्पाइनल कैनाल या स्पाइन की बोन्स में विकसित हो सकता है। जब कोशिकाएं असामान्य रूप से विकसित और विभाजित होकर स्पाइनल कॉर्ड या स्पाइनल कॉलम में एक पिंड या गुच्छा बना लेती हैं, तो इसे स्पाइल ट्यूमर कहते हैं। स्पाइनल ट्यूमर के कारण दर्द होता है, तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याएं हो जाती हैं और कभी-कभी पैरालिसिस भी हो जाता है।

स्पाइनल आथ्र्राइटिस
स्पाइनल आथ्र्राइटिस गर्दन और कमर के निचले हिस्से के जोड़ों और डिस्क के कार्टिलेज में टूट-फूट होने से होता है। कई बार इसके कारण स्पाइनल कॉलम से निकलने वाली तंत्रिकाओं पर दबाव पड़ता है, जिससे हाथों या पैरों में दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है।   

सर्वाइकल माइलोमैलेसिया
सर्वाइकल माइलोमैलेसिया में स्पाइनल कॉर्ड दब जाती है, जिससे स्पाइनल कॉर्ड का वॉल्यूम कम हो जाता है और वो मुलायम हो जाता है। इससे पूरे शरीर में समस्या हो सकती है। इसके कारण दर्द, सांस लेने में परेशानी, मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना, तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली बिगड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।