इंदौर
इंदौर आई हॉस्पिटल की लापरवाही से अब तक 15 मरीज़ अपनी आंखों की रौशनी गवां चुके हैं. इस मामले में अस्पतालों (Hospital) का मानवीय चेहरा भी सामने आ रहा है. इंदौर के चौइथराम अस्पताल (Choithram Hospital) और चेन्नई (Chennai) के शंकर नेत्रालय (Shankar Netralay) ने मरीज़ों से कोई भी शुल्क नहीं लेने की घोषणा की है. कलेक्टर ने इस मामले में ज़िला अंधत्व निवारण अफसर को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की सिफारिश की है. स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. इस बीच अब इस मामले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में आरोप प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई है.

इंदौर आई हॉस्पिटल में आंखों की रोशनी गंवाने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. दो और नए मरीजों के सामने आने के बाद ये संख्या 15 हो गई है. अस्पताल की लापरवाही से बिगड़े मोतियाबिंद ऑपरेशनों के एक और मरीज को चेन्नई भेजा गया है. अब तक 5 मरीज चेन्नई भेजे जा चुके हैं. इस मामले में कलेक्टर ने भी हेल्थ कमिश्नर को अपनी रिपोर्ट भेज दी है. इस रिपोर्ट में जिला अंधत्व निवारण अधिकारी टीएस होरा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की अनुशंसा की गई है क्योंकि 2011 में भी ये ही प्रभारी थे. तब 18 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी, वहीं धार और इंदौर सीएमएचओ की भी लापरवाही सामने आई है.

जिला प्रशासन ने अस्पताल को कब्जे में लेने की तैयारी शुरू कर दी है. स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट का कहना है कि जब तक मरीज ठीक नहीं हो जाते तब तक चेन्नई के आई स्पेशलिस्ट राजीव रमण इंदौर में ही रहेंगे. उन्होंने कहा कि इस मामले को सीएम कमलनाथ गंभीरता से ले रहे हैं. दोषियों को बख्शा नही जाएगा.

अब इस मामले में राजनीति शुरू हो गई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इंदौर में बीजेपी के सांसद समेत 5 विधायक हैं लेकिन पार्टी की ओर से कोई भी नुमाइंदा मरीजों की सुध लेने नहीं पहुंचा. जबकि स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट पूरे समय मरीजों के साथ रहे. कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला का कहना है कि शहर में बीजेपी सांसद शंकर लालवानी और 5 विधायक मौजूद रहे, लेकिन वो न मरीजों को देखने पहुंचे और न उनकी सहायता के लिए आगे आए.

वहीं बीजेपी सांसद शंकर लालवानी का कहना है कि वे पहले दिन से ही जिला प्रशासन और डॉक्टरों के संपर्क में थे. उन्होंने शंकर नेत्रालय के डॉक्टरों से भी बात की थी. इस मामले में राजनीति से ऊपर उठकर काम होना चाहिए.

बहरहाल, इस मामले को लेकर भले ही बीजेपी-कांग्रेस आमने सामने हों, लेकिन सरकार के साथ अस्पताल भी अपना समाजिक सरोकार निभा रहे हैं. यही कारण है कि मरीजों का इलाज कर रहे इंदौर के चौइथराम अस्पताल और चेन्नई के शंकर नेत्रालय ने कोई शुल्क नहीं लेने की घोषणा की है, जबकि सरकार ने इलाज का खर्च उठाने की बात कही थी.