बलपुर
 मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण बढ़ाकर 27 फीसदी करने को चुनौती के मामले को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने तक स्थगित करने से इनकार कर दिया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आरएस झा एवं जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार की इस मांग को सुको पहले ही खारिज कर चुका है। वहीं राज्य सरकार ने मामले का जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसे मंजूर कर कोर्ट ने अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित कर दी।

यूथ फॉर इक्वेलिटी संस्था, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे व प्रत्यूष द्विवेदी की ओर से याचिका दायर कर बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी मामले में स्पष्ट कहा है कि किसी भी स्थिति में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

मध्यप्रदेश में पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत 50 प्रतिशत आरक्षण लागू था। इसमें 20 प्रतिशत एसटी, 16 प्रतिशत एससी और 14 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण का प्रावधान था। राज्य सरकार ने 8 मार्च 2019 को एक अध्यादेश जारी कर ओबीसी के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया।

अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने दलील दी कि ओबीसी का आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने से प्रदेश की शासकीय नौकरियों में आरक्षण की कुल सीमा बढ़कर 63 प्रतिशत हो गई है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है। बुधवार को नागरिक उपभोक्ता मंच व अन्य की ओर से संशोधित याचिका पेश की गई। इस पर सरकार की ओर से इसका जवाब पेश करने के लिए समय मांग लिया गया।