Friday, October 19th, 2018

भिवंडी में एमएनएस कार्यकर्ताओं ने रोकी 'बुलेट ट्रेन' की राह

भिवंडी
प्रस्तावित बुलेट ट्रेन के लिए जमीन की नापजोख करने भिवंडी तालुका के कवनी गांव आए अधिकारियों का महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया है। उनके भारी विरोध के कारण जमीन के नापजोख का काम बंद पड़ गया है। बता दें कि अहमदाबाद-मुंबई रूट पर पहली बुलेट ट्रेन के ट्रैक निर्माण के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि मुंबई से अहमदाबाद के बीच प्रस्तावित बुलेट ट्रेन के लिए जमीन की नापजोख करने राजस्व विभाग सहित रेल अधिकारियों की टीम भिवंडी तालुका के कवनी गांव में आई थी। एमएनएस के विरोध की आशंका को देखते हुए वहां पुलिस का भारी बंदोबस्त किया गया था। बावजूद इसके अधिकारियों को एमएनएस कार्यकर्ताओं के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। भिवंडी लोकसभा संपर्क संगठक राजन गावंड के नेतृत्व में प्रदेश उपाध्यक्ष डी.के.म्हात्रे सहित एमएनएस के अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता वहां जमा होकर मांग करने लगे कि बुलेट ट्रेन के लिए किसानों की जमीन की नापजोख न की जाए लेकिन ग्रामीण पुलिस ने जमीन की नापजोख शुरू करा दी। जिससे वहां मौजूद विद्यार्थी एमएनएस के कार्यकर्ता नाराज हो गए और जमीन की नापजोख करने वाली मशीन को गिराकर काम बंद करा दिया। उसी समय एमएनएस विद्यार्थी सेना के अध्यक्ष द्वारा मशीन का बैग ले जाने के प्रयास के दौरान पुलिस के साथ उनकी झटपट भी हो गई। एमएनएस कार्यकर्ताओं को शांत करने के लिए प्रांत अधिकारी डॉ.संतोष थिटे सहित अन्य अधिकारी एमएनएस पदाधिकारियों के साथ जमीन पर बैठकर उनसे चर्चा करने लगे।

बिल्डर को लाभ पहुंचाने का आरोप
इस दौरान राजन गावंड ने आरोप लगाया कि यह मार्ग सिर्फ लोढा बिल्डर को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना था कि भिवंडी तालुका से बुलेट ट्रेन के मार्ग को रद्द किया जाना चाहिए। एमएनएस कार्यकर्ताओं ने आंदोलन तेज करने का इशारा करते हुए कहा कि उन्हें रोजगार चाहिए, बुलेट ट्रेन नहीं। उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन का मार्ग बदलने से इस परियोजना में 10 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। इस परियोजना की कीमत एक लाख करोड़ है, इसकी जगह महाराष्ट्र में दूसरी परियोजना लाए जाने पर यहां के पांच लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध हो सकता है।

भूमिपूजन के बाद बदला गया था रूट
गौरतलब है कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के मार्ग का भूमिपूजन करने के बाद उसके मार्ग में परिवर्तन करके भिवंडी तालुका से कर दिया गया है जबकि पहले प्रस्तावित मार्ग पश्चिम उपनगर वसई-पालघर से था। बुलेट ट्रेन का मार्ग भिवंडी तालुका से करने के कारण यहां के किसानों की 27 हेक्टेयर जमीन और सात गांवों में डिपो बनाने के लिए 85 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाने वाला है। किसानों का आरोप है कि सोने के भाव की उनकी जमीन कौड़ियों के भाव में ली जा रही हैं। इसके कारण किसान इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। एमएनएस के इस आंदोलन में संतोष सालवी, शिवनाथ भगत, शैलेश बिडवी, हनुमान वारघडे, गणेश भोईर, शरद नागावकर, संजय पाटील, मनसे विद्यार्थी सेना के कुलेश तरे और परेश चौधरी सहित भारी संख्या में किसान शामिल थे।

Source : Agency

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