नई दिल्ली
साल के बीच के महीने भारत के लिए प्राकृतिक आपदाओं से भरे होते हैं. पहले कई राज्य सूखा और तेज गर्मी से त्रस्त होते हैं और फिर मॉनसून के बाद आई बाढ़ कई राज्यों की तबाही को कई गुना बढ़ा देती है. बाढ़ की वजह से लाखों लोग बेघर हो जाते हैं, हजारों घर नष्ट हो जाते हैं, हजारों हेक्टेयर फसल तबाह हो जाती है, साथ ही काफी संख्या में लोग मारे जाते हैं. अकेले बाढ़ से पिछले 20 सालों में 547 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. इतने में देशभर में ढाई लाख से ज्यादा स्कूल खोले जा सकते थे.

हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ अपना रौद्र रूप दिखा रही है, इन दिनों एक दर्जन राज्यों से ज्यादा राज्य बाढ़ की चपेट में है, इनमें से कई राज्य तो ऐसे हैं जो कुछ दिन पहले तक सूखे और भीषण गरमी से परेशान थे, लेकिन बारिश का सीजन आने के बाद यहां के लोगों के लिए बाढ़ अब काल बन गई है. करीब दो महीने पहले उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की 42 फीसदी आबादी सूखे और गर्मी से परेशान थी, अब बाढ़ का सामना कर ही है.

देशभर में बाढ़ की वजह से अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. 70 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ की वजह से प्रभावित हैं और कई लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है. सैकड़ों की संख्या में घर ध्वस्त हो गए हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, असम समेत के कई राज्यों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गया है. मुंबई में बारिश अपनी तबाही मचा रहा है.

20 साल में बाढ़ से 547 लाख करोड़ स्वाहा

बाढ़ और सूखा ये ऐसी प्राकृतिक आपदा है जो हर साल देश को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाती है. संयुक्त राष्ट्र ने पिछले साल अक्टूबर में इकोनॉमिक लॉसेज, पॉवर्टी एंड डिजास्टर 1998-2017 नाम से एक रिपोर्ट जारी की जिसके अनुसार पिछले 20 सालों में वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित देशों को 2,908 बिलियन डॉलर का भारी नुकसान हुआ है जिसमें मौसम के बदलने के कारण आपदाओं से 2,245 बिलियन डॉलर स्वाहा हो गए जो कुल नुकसान का 77 फीसदी है.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले भारत को पिछले 2 दशकों (1998-2017) में बाढ़ के कारण 79.5 बिलियन डॉलर यानी 54,73,45,57,50,000 रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. बाढ़ के लिहाज से 2018 का साल भारत के लिए बेहद बुरा रहा. कई राज्यों समेत केरल में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई.

तो खुल जाते ढाई लाख से ज्यादा स्कूल

अगर देश में एक 12वीं क्लास तक का स्कूल खोलने में औसतन 2 करोड़ रुपये का खर्च आता है तो बाढ़ की विभीषिका से पिछले 20 सालों में जितना आर्थिक नुकसान (547 लाख करोड़ रुपये) हुआ उससे तो देशभर में 2 लाख 73 हजार 6 सौ से ज्यादा इंटरमीडिएट स्तर के स्कूल खोले जा सकते थे, लेकिन यह पानी में बह गया.

बाढ़ के कारण 2018 में 27 लाख लोग बेघर हुए, जिसमें अकेले 15 लाख लोग केरल से ही थे और इन्हें 5,600 कैम्पों में ठहराया गया था. राज्य में 2 हजार से ज्यादा मकान ध्वस्त हो गए जबकि 22 हजार मकानों को नुकसान पहुंचा. इसके अलावा समुद्रतटीय इलाकों में कई चक्रवाती तूफानों के कारण करीब 7 लाख लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा.