Friday, October 19th, 2018

कौन और कैसे होते हैं दुनिया के जीनियस बच्चे.

आपका बच्चा तो जीनियस है – यह लाइन सुनकर किसी भी मां बाप का सीना गर्व से फूल जाता होगा. हो भी क्यों न, कितने बच्चे ऐसे होते हैं जो 5 साल की उम्र में फर्राटेदार तरीके से किताबें पढ़ने लग जाएं. या देश दुनिया में होने वाली घटनाओं को ब्यौरा याद रखने लग जाएं. या फिर अंग्रेजी के लंबे लंबे शब्दों की स्पेलिंग याद रखने लग जाएं. वैसे कोई बच्चा जीनियस है उसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ पैमाने बना रखे हैं. जैसे – असामान्य याददाश्त, कम उम्र में पढ़ना शुरू करना, किसी खास विषय में गहरा ज्ञान, दुनिया भर की घटनाओं का ब्यौरा. इसके अलावा हर वक्त सवाल करना, म़जाकिया लहज़ा, संगीत में अग्रणीय भी कुछ और ऐसी बातें हैं जो बच्चों के जीनियस होने का पैमाना माना जाता है.

विलक्षण प्रतिभा के धनी बच्चे अपने आप में अनोखे होते हैं. हर बच्चा अलग है लेकिन इनमें कुछ बातें समान भी होती हैं. एन हलबर्ट ने अपनी किताब ‘ऑफ द चार्ट्स’ में इस बारे में विस्तार से लिखा है – इस तरह के बच्चों का ज्यादातर अपने रौबदार अभिभावक से अलगाव रहता है. दूसरी बात जो देखी गई है वह यह कि ज्यादातर बच्चे, बड़े होने तक अपनी विलक्षणता को बरकरार नहीं रख पाते.

कुछ मनोविज्ञानिक यह भी मानते हैं कि बच्चे को इस तरह के हुनर अनुवांशिकी तौर पर मिलते हैं. लेकिन कुछ का मानना है कि ऐसा जरूरी नहीं है. ज्यादातर मामलों में बच्चे की प्रतिभा को घर में काफी निखारा जाता है. उदाहरण के लिए टेनिस प्रतिभा सेरेना और वीनस विलियम्स के पिता ने काफी कम उम्र में उन्हें ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया था. कहते हैं कि विलियम्स बहनों के पिता ने दुनिया को छका देन वाली खिलाड़ियों को तैयार करने का ऐलान बेटियों के जन्म के साथ ही कर दिया था.

कुछ बच्चे कुछ ही महीनों में बोलना और शब्दों को समझना सीख जाते हैं

लेकिन जैसा कि हमने कहा जरूरी नहीं कि बचपन में जो जीनियस कहलाया गया है – वह बड़े होने पर भी उतना ही चतुर निकले. आईक्यू टेस्ट में अच्छे मार्क्स इस बात की गारंटी बिल्कुल नहीं देते. 400 अमेरिकी बच्चों पर हुई एक स्टडी से सामने आया था कि 140 से ऊपर आईक्यू वाले बच्चों ने अपनी जिंदगी के बाद के हिस्से में कुछ खास नहीं किया. बाल मनौविज्ञान को समझने वाले जानकार आईक्यू टेस्ट में अच्छे नंबर लाने या क्विज़ जीत लेने वाले काम को अभिभावकों और शिक्षकों को खुश करने की नीयत से किया गया काम ज्यादा समझते हैं. उन्हें लगता है कि बड़ो को प्रभावित या खुश करने के लिए जो काम किये जाते हैं, उसमें मौलिकता की कमी होती है.

वहीं जरूरी है कि अभिभावक यह समझें कि जीनियस बच्चा होने के कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं. जैसे दुनिया के बारे में कुछ ज्यादा ही जल्दी जान लेना और अपनी उम्र के बच्चों के साथ ज्यादा बातचीत नहीं करना. ऐसा भी नहीं है कि जीनियस बच्चे किसी एक ही क्षेत्र से निकलकर आते हैं. कोई गणित में तेज़ है तो किसी ने मेडिकल में झंडे गाड़े. तो कोई अपनी बातों से सबका दिल जीत बैठा. आइए जानते हैं कुछ ऐसे जीनियस बच्चों के बारे में -

जरूरी नहीं कि यह प्रतिभा अनुवांशिक तौर पर मिली हो


किम उंग यॉन्ग – इन्हें दुनिया का सबसे बड़ा जीनियस बच्चा माना जाता है. 1962 में यह कोरिया में जन्मे थे औऱ चार साल की उम्र में इन्होंने कोरियन, जापानी, अंग्रेजी, जर्मन भाषाएं पढ़नी सीख ली थी. इसके अलावा वह गणित के कठिन सवाल चुटकियों में सुलझा लेते थे. सात साल की उम्र में तो जनाब अमेरिका के नासा में बुला लिए गए थे. कोरिया का यह सुपर जीनियस 15 साल की उम्र में फिज़िक्स में पीएचडी कर बैठा था, वो भी कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी से.

अकरित जायसवाल  - साल 2000 में अकरित दुनिया की नज़र में आए थे. उन्होंने सात साल की उम्र में अपने इलाके की लड़की की सर्जरी की थी. लड़की के हाथ एक दुर्घटना में जल गए थे. उन्हें दुनिया के सबसे स्मार्ट बच्चे का खिताब मिल चुका है. अकरित ने मेडिसन विज्ञान में कम उम्र में ही महारत हासिल कर ली थी और 12 साल की उम्र में ही उन्हें पंजाब मेडिकल यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल गया था. उन्होंने दावा भी किया था कि वह कैंसर का इलाज ढूंढने के करीब पहुंच चुके हैं.


प्रियांशी सोमानी - इन्हें भारत की मेंटल कैलकुलेटर कहना गलत नहीं होगा. वह मेंटल कैलकुलेशन वर्ल्ड कप 2010 का खिताब जीत चुकी हैं. इस प्रतियोगिता में गुणा, भाग, जोड़, वर्गमूल, आदि को उन्होंने 100% सटीकता के साथ निभाया. उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है.

एलायना स्मिथ - इस बच्ची का क्या कहें, यह सात साल की उम्र में रेडियो स्टेशन की रानी बन गई. ब्रिटेन की सबसे छोटी सलाहकार जो किसी भी समस्या का चुटकियों में हल निकाल लेती थी. एक लोकल रेडियो स्टेशन पर एलायना ने फोन करके एक श्रोता की प्रेम से जुड़ी समस्या का समाधान बताया. फिर क्या था रेडियो वाले इतने खुश हुए कि उन्होंने एलायना को एक शो दे दिया जिसमें वह प्यार और बॉयफ्रेंड से जुड़ी समस्याओं पर अपने श्रोताओं की मदद किया करती थी. ध्यान रहे एलायना सिर्फ सात साल की थी.

ऐसे कई और बच्चे हैं जो अलग अलग क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते आ रहे हैं. इनके अंदर बचपन में बुद्धि का प्रवाह जितनी तेज़ी से बहता है, बड़े होते होते इसे संभाल पाना मुश्किल हो जाता है. या यूं कहें कि उसे बनाए रखने के लिए सतत कोशिश की जानी जरूरी है. अगर इसे ऊपर वाले का तोहफा मानकर चलेंगे और ध्यान नहीं देंगे तो यह तोहफा कुछ दिनों में पुराना पड़ जाएगा.

Source : Agency

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